कृषि विभाग की पहल : मक्का फसल को फाल आर्मी कीट से बचाने के बताएं उपाय

कृषि विभाग की पहल : मक्का फसल को फाल आर्मी कीट से बचाने के बताएं उपाय

उदयपुर, 4 अगस्त। जिला कलक्टर तारांचद मीणा के निर्देशानुसार कृषि विभाग की ओर से जिले में मक्का फसल में फालआर्मी कीट का प्रकोप होने की संभावना को देखते हुए कीट की पहचान एवं नियंत्रण के संबंध में उचित परामर्श जारी किये गये है।
उपनिदेशक कृषि विस्तार माधव सिंह चंपावत ने बताया कि विभाग ने फसल में फॉल आर्मी कीट प्रबन्धन के संबंध में परामर्श दिया है ताकि समय रहते किसान अपनी फसलों को इन कीटों के प्रकोप से बचा सके। उन्होंने बताया कि जिले में अंतिम 1 महीने से लगातार वर्षा होने से कीट का नियंत्रण स्वतः हो रहा था लेकिन एक सप्ताह से वर्षा कम होने से कीट का प्रकोप उसकी अनुकूलतम दशा मिलने से बढ़ रहा है अगर लगातार वर्षा होती है तो कीट नियंत्रित होता रहता है।
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार के दिशा-निर्देशानुसार जिले में सभी ग्राम पंचायत स्तर पर फॉल आर्मी वर्म प्रकोप पर प्रशिक्षणों को आयोजन समय-समय किया जा रहा है। सभी ग्राम पंचायत स्तर पर अगले तीन दिनों में कृषक गोष्ठियों का आयोजन कर कृषकों को जागरूक किया जायेगा। राज्य सरकार 5000 हैक्टर में मक्का की फसल में फॉल आमी वर्म के नियंत्रण हेतु रसायन की स्वीकृति प्राप्त हुई है। जिसके लिए प्रति हैक्टर 500 रुपये कीटनाशी हेतु प्रावधान है। अनुदान हेतु कृषक राज किसान साथी पर पंजीकृत आदान विक्रेता से कीटनाशी खरीद कर अनुदान प्राप्त कर सकेगा।
कीट की पहचान व नुकसान :
उपनिदेशक सिंह ने बताया कि अण्डों से निकली प्रथम अवस्था की लार्वा का रंग हल्का पीला या सफेद होता है सिर काले रंग का होता है। जैसे-जैसे लार्वा बड़ा होता इसके सिर पर उलटी (वाई) आकार का निशान होता है। इस कीट की सूण्डी मक्का के तनों में छेद करके अन्दर घुस जाती है। पत्तियों पर छिद्र हो जाते है। मक्का के तने की कोमल पत्तियों को खाते हुऐ बहुत सारा विष्ठा (मल) पत्तियों पर छोड देती है। साथ ही इस कीट का प्रकोप ज्यादा होने पर सुण्डियां भुट्टों को छेदकर दानों को भी नुकसान पहुंचाती है। इसकी पसंदीदा फसल मक्का है।
नियंत्रण व बचाव :
उन्होंने बताया कीट से नियंत्रित करने हेतु हाथों से लार्वा चून कर और अण्डों को केरोसीन मिश्रित पानी में डूबो कर नष्ट कर सकते हैं। फॉल आमी वर्म आक्रमण के बाद प्रभावित मक्का के पोधों के पोटे या गाला में सूखी रेत का प्रयोग करना चाहिए। 15 फीरोमन ट्रेप प्रति एकड के हिसाब से लगा कर नियंत्रण किया जा सकता है। एजाडिरेक्टिन 1500 पीपीएम, 5 मिली को छिड़काव करके भी नियंत्रण किया जा सकता है। ट्राईकोग्रामा प्रेटियोसम या टीलोनामेस रेमस, अण्ड पर जीव्याभ को 50000 प्रति एकड की दर से एक सप्ताह के अन्तराल पर मक्का की फसल में छोड़कर बचाव कर सकते है। मेटाराईजियम एनीसोपिली अथवा ब्यूवेरिया बेसियाना अथवा न्यूमेरिया रिली की 5 ग्राम मात्रा प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर मक्का की फसल की बुवाई के 15-25 दिन बात तने में उपयोग कर इस पर नियंत्रण किया जा सकता है। वहीं निर्धारित मात्रा में ईमामेक्टिन बेन्जोएट स्पाइनेटोरम, क्लोरन्ट्रानिलप्रोल, थायमिथोक्जोम, लेम्डासायहेलाथ्रिन, ट्राईकोकार्ड आदि के उपयोग के भी मक्का की सुरक्षा की जा सकती है।
  • Powered by / Sponsored by :