ई-शक्ति से जुड़ेंगे जिले के पांच हजार स्वयं सहायता समूह

ई-शक्ति से जुड़ेंगे जिले के पांच हजार स्वयं सहायता समूह

उदयपुर, 9 मार्च/महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक की अगुवाई में स्वयं सहायता समूहों का डाटाबेस तैयार करने के लिए “ई शक्ति“ का आगाज किया गया है।
यह जानकारी जिला कलक्टर बिष्णुचरण मल्लिक की अध्यक्षता में शुक्रवार को आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में दी गई। जिला कलक्टर ने कहा कि यहि महत्वपूर्ण कार्यक्रम है जो पूरे जिले में स्वयं सहायता समूहों को एक प्लेटफॉर्म पर ले आएगा। उन्होंने कहा कि जिले में 5 हजार से अधिक कार्यरत स्वयं सहायता समूह डिजिटाइजेशन का कार्य 30 मार्च तक पूरे समन्वय एवं जिम्मेदारी से पूरा किया जाए। उन्होंने राजीविका की जिला परियोजना प्रबंधक श्रीमती सरला मेहता को निर्देश दिए कि वे इस अभियान की सतत मॉनिटरिंग करें एवं उपलब्धि से अवगत कराए।
बैठक में नाबार्ड के केन्द्रीय कार्यालय के सलाहकार समरेश परीदा एवं जिला विकास प्रबंधक शशि जैन ने जिले में एनजीओ से सम्पर्क एवं एसएचसी जागरूकता अभियान के माध्यम से करने की प्रगति में सहयोग का आग्रह किया। प्रधानमंत्री के डिजिटल इण्डिया की कल्याणकारी सोच को मूर्त रूप प्रदान करने की दिशा में ई-शक्ति पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चलाया जा रहा है। ई शक्ति स्वयं सहायता समूहों में बैंक की कार्यप्रणाली के प्रति जागरूकता लाने का अभिनव कदम है। इसमें लेन-देन निकासी में पारदर्शिता लाने ग्राहकों को एसएमएस से त्वरित जानकारी प्रदान करना है।
नाबार्ड - ई-शक्ति परियोजना
डिजिटल भारत बनाने के लिए भारत सरकार के मिशन को ध्यान में रखते हुए, नाबार्ड ने देश में सभी स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के डिजिटलीकरण के लिए एक परियोजना शुरू की। यह परियोजना पूरे देश के 100 जिलों में कार्यान्वित की जा रही है। नाबार्ड द्वारा उठाई गई कुछ प्रमुख पहलों में एसएचजी का डिजिटलीकरण है। स्वयं सहायता समूह के लिए एक मजबूत डप्ैका निर्माण और पारदर्शिता सभी हितधारकों, विशेष रूप से बैंकरों के लिए चिंता का एक प्रमुख मुद्दा है। नाबार्ड ने पायलट आधार पर पहले चरण में झारखंड राज्य के रामगढ़ जिले एवं महाराष्ट्र राज्य के धुले जिले लागू किया। दूसरे चरण में 22 जिलों का चयन किया गया, जिसमे राजस्थान में बीकानेर और झालावाड़ जिले चयनित हुए। वर्ष 2017-18 में राजस्थान के 7 नए जिलों का ई-शक्ति फेस तृतीय में चयन किया गया है जिसमें अजमेर, अलवर, जोधपुर, झुंझुनूं, बांसवाड़ा, कोटा और उदयपुर शामिल हैं। इस चरण में 37000 से अधिक स्वयं सहायता समूह को 24 संस्थाओं के माध्यम से डिजिटाइज किया जाएगा।
परियोजना के हितधारक
ग्रामीण गरीब समुदाय और एसएचजी, स्व-सहायता प्रमोटिंग संस्थानों (एसएचपीआई), गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ), बैंकों, नाबार्ड, सरकारी विकास विभागों और एसएलआरएम, एनएलआरएम जैसी एजेंसियों आदि के सदस्य। बाद के चरण में क्रेडिट ब्यूरो भी बोर्ड पर हो सकते हैं। मोटे तौर पर ई-शक्ति सॉफ्टवेयर के यूएसपी स्व-सहायता समूहों के सभी सदस्यों की सामाजिक और वित्तीय जानकारी की एक-क्लिक पर उपलब्धता है।