आरबीआई ने रेपो रेट बढ़ाकर 5.40 प्रतिशत की, आरबीआई के इस फैसले से होम लोन की ईएमआई होगी महँगी

आरबीआई ने रेपो रेट बढ़ाकर 5.40 प्रतिशत की, आरबीआई के इस फैसले से होम लोन की ईएमआई होगी महँगी

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट को 50 आधार अंक बढ़ाकर 5.40 प्रतिशत करने का निर्णय लिया है। आरबीआई (RBI) के इस फैसले के बाद अब रेपो रेट की दर 4.9% से बढ़कर 5.40% हो गई है। परिणामस्वरूप, स्थायी जमा सुविधा (एसडीएफ) दर 5.15 प्रतिशत और सीमांत स्थायी सुविधा (एमएसएफ) दर और बैंक दर 5.65 प्रतिशत हो गई है। जानकारों का मानना है कि रिजर्व बैंक ने महंगाई में कमी लाने के लिए रेपो रेट में बदलाव किया है। आरबीआई के इस फैसले के बाद होम लोन की ईएमआई में महँगी होगी। भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से रेपो रेट में बढ़ाने के बाद से बैंकों ने लोन की दरों में बढ़ोतरी शुरू कर दी है।

आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikant Das) ने इस फैसले की जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि यह फैसला वर्तमान और उभरती समष्टि आर्थिक परिस्थिति का आकलन करने के आधार पर लिया गया है। आरबीआई गवर्नर ने तीन दिनों तक चली एमपीसी (Monetary Policy Committee) की बैठक के बाद इस फैसले का एलान किया है। एमपीसी के सभी सदस्य - डॉ. शंशाक भिडे, डॉ. आशिमा गोयल, प्रो. जयंत आर. वर्मा, डॉ. राजीव रंजन, डॉ. माइकल देवब्रत पात्र और श्री शक्तिकांत दास ने नीतिगत रेपो दर को 50 आधार अंक बढ़ाकर 5.40 प्रतिशत करने के लिए सर्वसम्मति से मतदान किया।

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि दुनिया भर में महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर है. भारत में इसका असर देखने को मिल रहा हे। जून लगातार छठा ऐसा महीना रहा, जब खुदरा महंगाई रिजर्व बैंक के अपर लिमिट से ज्यादा रही। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक घटनाक्रमों में तेजी से आ रहे बदलाव के बीच ग्लोबल फूड प्राइसेज में नरमी, यूक्रेन से गेहूं के निर्यात की पुन: शुरुआत, घरेलू बाजार में खाने के तेल के दाम में नरमी और अच्छे मानसून के कारण खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी से आने वाले समय में महंगाई के मोर्चे पर राहत मिल सकती है। हालांकि इसके बाद भी खुदरा महंगाई की दर ऊंची बनी रहने वाली है।

बैठक में वैश्विक अर्थव्यवस्था का आकलन

जून 2022 में एमपीसी की बैठक के बाद से, वैश्विक आर्थिक और वित्तीय वातावरण, विश्व भर में मौद्रिक नीति की सख्ती और यूरोप में जारी युद्ध से मंदी का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने बताया कि वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और बड़ी बिकवाली में वृद्धि देखी गई है। अमेरिकी डॉलर सूचकांक जुलाई में दो दशक के उच्च स्तर पर पहुंच गया। उन्नत अर्थव्यवस्थाओं (एई) और उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं (ईएमई), दोनों ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अपनी मुद्राओं को कमजोर होते देखा। ईएमई, पूंजी बहिर्वाह और आरक्षित निधि संबंधी हानि का सामना कर रहे हैं जो उनकी संवृद्धि और वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम बढ़ा रहे हैं।

जानिए रेपो रेट का गणित -

दरअसल रेपो रेट वो दर होती है जिस पर आरबीआई दूसरे बैंकों को कर्ज मुहैया कराती है। इसके विपरीत रिवर्स रेपो रेट उस ब्याज दर को कहते हैं जो आरबीआई के पास पैसा रखने पर केंद्रीय बैंक बैंको को देती है। इसलिए आमतौर पर यह माना जाता है कि अगर आरबीआई रेपो रेट घटाएगा तो बैंक ब्याज दर कम करेंगे और अगर आरबीआई रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंक ब्याज दर बढ़ाएंगे। इससे आम आदमी को मिलने वाला लोन महंगा हो जाएगा।
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