सांसद कर्नल राज्यवर्धन ने लोक सभा में सरकारी स्कूलों में इंटरनेट सुविधाओं के सम्बंध में पूछे प्रश्न

सांसद कर्नल राज्यवर्धन ने लोक सभा में सरकारी स्कूलों में इंटरनेट सुविधाओं के सम्बंध में पूछे प्रश्न

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं जयपुर ग्रामीण सांसद कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने लोकसभा में सरकारी स्कूलों में इंटरनेट सुविधाओं से सम्बंधित मुद्दे उठाए। उन्होंने पूछा राजस्थान में कितने सरकारी स्कूलों में इंटरनेट सेवा उपलब्ध है, क्या सरकार की योजना उन सरकारी स्कूलों, जो अभी तक इंटरनेट सुविधाओं से नहीं जुड़े हैं, को नेशनल ब्रॉडबैंड मिशन या बीएसएनएल नेटवर्क के माध्यम से जोड़ने की है, या सरकारी स्कूलों के पास वैश्विक महामारी के बाद दूरदराज के क्षेत्रों से यात्रा करने वाले छात्रों के लिए हाइब्रिड लर्निंग जारी रखने का विकल्प है, या सरकार दूरदराज के क्षेत्रों के उक्त छात्रों के लिए 5जी डेटा का उपयोग करने की योजना बना रही है क्योंकि यह उच्च स्तर की वायरलेस कनेक्टिविटी है।

सांसद कर्नल राज्यवर्धन द्वारा पूछे गए सवालों का शिक्षा मंत्रालय में राज्य मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने जवाब दिया कि राजस्थान में 19255 सरकारी सकूलों के पास इंटरनेट सुविधा है। बीएसएनएल सरकारी स्कूलों को एफटीटीएच (फाइबर टू होम) कनेक्शन प्रदान करने के लिए आगे आया है और बीएसएनएल के अनुरोध के आधार पर मंत्रालय द्वारा राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों को सरकारी स्कूल जिनके पास कंप्यूटिंग डिवाइस हैं को एफटीटीएच कनेक्शन प्राप्त करने के लिए बीएसएनएल के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के लिए एक एडवाइजरी जारी की गई है।

स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय द्वारा देश के ग्रामीण और शैक्षिक रूप से पिछड़े जिलों में रहने वाले छात्रों सहित प्रत्येक छात्र के लिए निर्बाध शैक्षिक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक बहु आयामी दृष्टिकोण अपनाया गया है। 17 मई, 2020 को आत्म निर्भर भारत अभियान के हिस्से के रूप में पीएम ई - विद्या नामक एक व्यापक पहल शुरू की गई है, जो शिक्षा के लिए मल्टी-मोड एक्सेस को सक्षम करने के लिए डिजिटल/ऑनलाइन/ऑन- एयर शिक्षा से संबंधित सभी प्रयासों को एकीकृत करती है। इस पहल में निम्नलिखित घटक शामिल हैंरू
1. दीक्षा राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों में स्कूल शिक्षा हेतु गुणवत्तापूर्ण ई-सामग्री प्रदान करने के लिए देश का डिजिटल बुनियादी ढांचाः और सभी कक्षाओं (एक राष्ट्र, एक डिजिटल प्लेटफॉर्म) के लिए क्यूआर कोडित सक्रिय पाठ्यपुस्तकें
2. कक्षा 1 से 12 तक प्रति कक्षा एक निर्धारित स्वयं प्रभा टीवी चैनल (एक कक्षा, एक चैनल)
3. रेडियो, सामुदायिक रेडियो और सीबीएसई पॉडकास्ट का व्यापक उपयोग- शिक्षा वाणी
4. दृष्टिबाधित और श्रवण बाधितों के लिए डिजिटली एक्सेसिबल इंफॉर्मेशन सिस्टम (डेज़ी) और एनआईओएस वेबसाइट/यूट्यूब पर सांकेतिक भाषा में विकसित विशेष ई-सामग्री

शिक्षा मंत्रालय ने जहां डिजिटल सुविधा (मोबाइल उपकरण/डीटीएच टेलीविजन) उपलब्ध नहीं है, वहां सामुदायिक रेडियो स्टेशनों और सीबीएसई की शिक्षा वाणी नामक पॉडकास्ट, शिक्षार्थियों के आवास पर पाठ्यपुस्तकों की आपूर्ति, 21वीं सदी के कौशल पर हैंडबुक और सामुदायिक/मोहल्ला कक्षाओं के आयोजन जैसी कई पहल की हैं। सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के लिए निरंतर अधिगम योजना (सीएलपी) की शुरूआत की गई है, विभिन्न राज्यों और संघ राज्य क्षेत्रों के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में जहां ऑनलाइन कक्षाएं संभव नहीं है वहां प्री-लोडेड टैबलेट का प्रभावी ढंग से उपयोग किया जाता है। इसके अलावा, अधिगम समाधान के लिए एक वैकल्पिक शैक्षणिक कैलेंडर तैयार किया गया है, जिसमें कक्षा 1 से 12 तक के डिवाइस वाले और डिवाइसरहित बच्चों का स्व - मूल्यांकन सहित अधिगम समाधान शामिल हैं। आरटीई अधिनियम, 2009 के प्रावधानों के तहत विशेष प्रशिक्षण केंद्रों (एसटीसी) में पढ़ रहे स्कूल से बाहर के बच्चों के अधिगम अंतराल को पाटने के लिए ब्रिज कोर्स मॉड्यूल भी विकसित किए गए हैं। जहां इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं है या बहुत कम बैंडविड्थ के साथ उपलब्ध है वहां ऐसे संसाधनों को टेलीविजन, रेडियो आदि जैसे विभिन्न प्लेटफार्मों, जो इंटरनेट पर निर्भर नहीं हैं, के माध्यम से साझा किया जाता है। स्कूल बंद होने के दौरान और उसके बाद घर आधारित शिक्षा में माता-पिता की भागीदारी के लिए दिशानिर्देश भी 2021 में जारी किए गए हैं।
  • Powered by / Sponsored by :