बीजीय मसालों फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीकी पर प्रशिक्षण का आयोजन

बीजीय मसालों फसलों की उन्नत उत्पादन तकनीकी पर प्रशिक्षण का आयोजन

झालावाड़ 12 अक्टूबर। राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र, अजमेर एवं कृषि विज्ञान केन्द्र, झालावाड़ के संयुक्त तत्वाधान में अनुसूचित जाति उपयोजना अंतर्गत एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण संपन्न हुआ।
कृषि विज्ञान केन्द्र, झालावाड़ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, डॉ अर्जुन कुमार वर्मा ने बताया कि मसाला फसलों में खरपतवार एक मुख्य समस्या है जो उपज में कमी के साथ-साथ कीट व व्याधि का प्रकोप भी बढ़ाती है। उन्होंने इसके निदान के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी दी।
राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं योजना के प्रभारी डॉ. शिव लाल ने बताया कि इस प्रशिक्षण में 30 कृषकों ने भाग लिया। उन्होंने बताया कि धनिया उत्पादन में झालावाड़ जिला एक प्रमुख स्थान रखता है। उन्होंने धनियाँ समेत सभी मसाला फसलों के उत्तम गुणवत्ता एवं उपज वाली प्रजातियों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया।
अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक, डॉ. नरेंद्र चौधरी ने धनियें की जैविक खेती की उत्पादन तकनीकियों के बारे में जानकारी दी। कृषि विज्ञान केन्द्र के प्रसार वैज्ञानिक डॉ. मोहम्मद युनूस ने वर्मीकम्पोस्ट बनाने की विधि के बारे में प्रायोगिक रूप से बताया। उन्होंने अपने उद्बोधन में राष्ट्रीय विशेष स्वच्छता अभियान अन्तर्गत ‘‘अपशिष्ट से खुशहाली’’ विषय पर उपस्थित प्रतिभागियों को पॉवरप्वाइंट प्रस्तुतिकरण के माध्यम से वर्मीकम्पोस्ट, नेडेप कम्पोस्ट, घरेलू अपशिष्टों को खेती में उपयोग करने के बारे में विस्तृत जानकारी दी ।
कृषि विज्ञान केन्द्र, झालावाड के उद्यान वैज्ञानिक अरविन्द नागर ने मसाला फसलों में फसलोत्तर प्रबंधन एवं गुणवत्ता नियंत्रण के बारे में अवगत करवाया। कार्यक्रम में सभी प्रतिभागियों को कृषि आदान (वर्मीबेड एवं सोलर टॉर्च) तथा प्रशिक्षण किट वितरित की गई। प्रशिक्षणार्थियों का पंजीकरण वरिष्ठ अनुसंधान अध्येता दिनेश कुमार चौधरी ने किया एवं कार्यक्रम के अंत में सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया ।
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