‘‘मृदा एवं जल संरक्षण’’ विषय पर असंस्थागत प्रशिक्षण एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित

‘‘मृदा एवं जल संरक्षण’’ विषय पर असंस्थागत प्रशिक्षण एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित

झालावाड़ 04 अगस्त। मृदा एवं जल संरक्षण विषय पर गांव जावर (मनोहरथाना) में गुरूवार को असंस्थागत प्रशिक्षण आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 32 कृषकों ने भाग लिया।
केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. अर्जुन कुमार वर्मा ने बताया कि कृषि विज्ञान केन्द्र के मृदा वैज्ञानिक एवं प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. सेवा राम रूण्डला ने प्रशिक्षण विषय के बारे में किसानों को विस्तार से परिचय कराया। उन्होंने कहा कि जल एवं मृदा के बिना उन्नत खेती किसानी नहीं की जा सकती है। जब जल का अभाव रहता है, तब इन प्राकृतिक संसाधनों की उपयोगिता स्वतः ही महसूस होने लग जाती है। अतः किसान समुदाय को मृदा व जल संरक्षण के विभिन्न उपायों द्वारा भविष्य के लिए संरक्षित कर खेती किसानी करनी चाहिए। ताकि वर्षभर रोजगार मिलने के साथ आमदनी प्राप्त होना सुनिश्चित हो।
मृदा व जल संरक्षण के लिए विभिन्न कच्चे व पक्के ढांचों (टांके, फार्म पौण्ड, डिग्गी, नाड़ी, छोटे सामुदायिक तालाब, चैकडेम, कन्टूर खेती की संरचनाएं आदि) का निर्माण किया जा सकता है। जिससे वर्षभर सिंचाई जल की आपूर्ति होने के साथ मृदा के कटाव को रोका जा सके। ‘‘प्रति बूँद अधिक फसल’’ स्लोगन का उपयोग कर मृदा व जल की उत्पादकता बढ़ाई जा सकती है। कृषकों से आह्वान किया कि सरकार द्वारा संचालित जल एवं मृदा संरक्षण की विभिन्न योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाना चाहिए।
प्रशिक्षण उपरान्त ‘‘वृक्षारोपण कार्यक्रम’’ का आयोजन किया गया, जिसमें कुल 260 पौधों (छायादार एवं फल वृक्ष) का पौधारोपण किया गया। इस दौरान कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में 35 नींबू, 20 पपीता के पौधों का पौधारोपण किया गया।
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