राजस्थान में 21 हजार से अधिक गांवों के विलेज एक्शन प्लान तैयार

राजस्थान में 21 हजार से अधिक गांवों के विलेज एक्शन प्लान तैयार

जयपुर, 13 सितम्बर। राजस्थान में जल जीवन मिशन के तहत गांव-गांव और ढ़ाणी-ढ़ाणी के स्तर पर स्थानीय पेयजल आवश्यकताओं का आंकलन करते हुए प्रत्येक गांव का विलेज एक्शन प्लान (वीएपी अर्थात ग्राम कार्य योजना) तैयार किया जा रहा है। राज्य के 43 हजार 323 गांवों में से अब तक 21 हजार से अधिक गांवों का 'वीएपी' तैयार कर लिया गया है।
यह जानकारी देते हुए जलदाय मंत्री डॉ. बी. डी. कल्ला ने बताया कि प्रदेश में जेजेएम के तहत वर्ष 2024 तक सभी ग्रामीण परिवारों को 'हर घर नल कनेक्शन' से जोड़ने के लिए युद्धस्तर पर कार्य चल रहा है। राज्य के करीब सभी गांवों में 'पानी समितियां' (ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियां) बनाते हुए स्थानीय स्तर पर मजबूत संस्थागत ढ़ांचा तैयार करने के बाद अब सभी गांवों की 'ग्राम कार्य योजना' बनाने के काम को योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में गत 15 अगस्त को आयोजित ग्रामसभाओं में बड़ी संख्या में 'वीएपी' का अनुमोदन किया गया । अब आगामी 2 अक्टूबर कोआयोजित होने वाली ग्राम सभाओं में शेष बचे गांवों की 'ग्राम कार्य योजनाओं' के अनुमोदन के लक्ष्य के साथ तेजी से कार्य किया जा रहा है।
तीन जिलों में शत-प्रतिशत उपलब्धि
प्रदेश के तीन जिलों अजमेर, नागौर एवं जैसलमेर के सभी गांवों के विलेज एक्शन प्लान तैयार किए जा चुके है। सिरोही में 96 प्रतिशत, करौली में 94 प्रतिशत, कोटा में 92 प्रतिशत, हनुमानगढ़ में 88 प्रतिशत, श्रीगंगानगर और सवाई माधोपुर में 85-85 प्रतिशत, चितौड़गढ़ में 83 प्रतिशत तथा डूंगरपुर जिले में 74 प्रतिशत से अधिक गांवों के विलेज एक्शन प्लान तैयार कर लिए गए है। शेष जिलों में भी यह कार्य निरंतर गति पकड़ रहा है। सोमवार तक की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में कुल 21 हजार 206 गांवों के विलेज एक्शन प्लान तैयार हो चुके है।
जलजरूरतों का मास्टर प्लान
ग्राम कार्ययोजना को सरल शब्दों में समझा जाएतो यह एक तरह से किसी गांव विशेष की जल जरूरतों को मास्टर प्लान है। इसमें पेयजल की उपलब्धता के इतिहास और मौजूदा परिदृश्य के साथ बारिश के पैटर्न, अकाल या सूखें के स्थितियां, किसी भी समय आई प्राकृतिक आपदा का विवरण, आपात परिस्थिति में टैंकरों याअन्य संसाधनों से जल परिवहन का आंकलन, भू-गर्भ जल एवं जल स्रोतों की हालत, स्रोतों के सुदृढ़ीकरण या भू-जल रिचार्ज से सम्बंधित कार्य, जल जनित बीमारियों के उद्धरण, जलसंरक्षण एवं बचत के उपाय आदि पहलुओं के परिदृश्य को दर्शाया जाता है। इस महत्वपूर्ण दस्तावेज में जेजेएम के तहत स्वीकृत ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं के क्रियान्वयन और रखरखाव जैसे तमाम आवश्यक पहलुओं के बारे में तथ्यात्मक जानकारी का समावेश भी किया जाता है।
ऐसे तैयार हो रहे है विलेज एक्शन प्लान
जेजेएम के तहत प्रदेश के जिलों में जिला जल एवं स्वच्छता समितियों के अधीन आईएसए-इम्पलीमेंटसपोर्ट एजेंसीज का चयन किया गया है। यह एजेंसी गांवों को दौरा कर वहां ग्रामीणों से पेयजल के परिदृश्य और भावी आवश्यकताओं के बारें में सार्वजनिक स्थानों पर व्यापक चर्चा करती है। इस मंथन से निकले निष्कर्ष को जेजेएम की गाइडलाइन के अनुसार ‘वीएपी‘के तहत सिलसिलेवार दर्ज किया जाता है। ग्रामीणों की सहभागिता से तैयार इस दस्तावेज को ग्राम सभाओं की बैठक में रखा जाता है और इस फोरम से इसका अंतिम अनुमोदन होता है। इस प्रकार तैयार ‘ग्राम कार्य योजना‘ जेजेएम के तहत स्वीकृत ग्रामीण पेयजल परियोजनाओं को आधार तो बनती ही है, साथ ही इसमें इन योजनाओं के क्रियान्वयन, रख-रखाव, जनभागीदारी और संचालन का रोडमैप भी मौजूद रहता है।
ये घटक भी शामिल
'वीएपी' में गांव की जल आवश्यकता के आकलन और उपलब्ध संसाधनों केविवरण के आधार पर ‘सिंगल विलेज स्कीम‘ (एसवीएस-एकल ग्राम योजना) या मल्टी विलेजस्कीम (एमवीएस-बहु ग्राम योजना) बनाने के बारें में निर्णय किया जाता हैं। इसमें गांव की सभी बस्तियों में पहले से मौजूद 'हर घर नल कनेक्शन' और पूरे गांव के सभी परिवारों को ‘हर घर नल कनेक्शन‘ के दायरे में लाने के लिए कितने कनेक्शन की और आवश्यकता है, के बारे में समस्त जानकारी उपलब्ध रहती है। इसमें गांव में प्रस्तावित जल स्रोत के स्थान एवं अंतःग्राम जल आपूर्ति संरचना के निर्माण के लिए ग्राम पंचायतया पानी समिति (ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति) के पक्ष में भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने से लेकर गांव में स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केन्द्र या ग्रामपंचायत भवन जैसे सार्वजनिक संस्थानों के लिए जल आपूर्ति योजना तथा पेयजल योजना के प्रचालन एवं सामान्य श्रेणी के मरम्मत कार्यों के लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध दक्षमानव श्रम, स्वच्छता जांच की समय सारिणी, जल सुरक्षा एवं संरक्षा योजना, फील्ड टेस्टिंग किट के माध्यम से जन की गुणवत्ता की जांच के लिए गांव में समर्पित व्यक्तियों की पहचान और उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था आदि का भी उल्लेख रहता है।
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