आइये जाने इस वर्ष 2018 में महालय/पितृपक्ष/श्राद्ध पक्ष क्या,क्यों और कैसे मनाये..???

आइये जाने इस वर्ष 2018 में महालय/पितृपक्ष/श्राद्ध पक्ष क्या,क्यों और कैसे मनाये..???

श्राद्ध, पूजा, महत्व, श्राद्ध की महिमा एवं विधि का वर्णन विष्णु, वायु, वराह, मत्स्य आदि पुराणों एवं महाभारत, मनुस्मृति आदि शास्त्रों में यथास्थान किया गया है। श्राद्ध का अर्थ अपने देवों, परिवार, वंश परंपरा, संस्कृति और इष्ट के प्रति श्रद्धा रखना है । श्राद्धों के वक्त आपके पूर्वज किसी भी तरह घर आ सकते हैं तो किसी भी आने वाले को घर से बाहर न भगाएं । उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. दयानन्द शास्त्री बे बताया की पितृ पक्ष में पशु पक्षियों को पानी और दाना दे- पितृ पक्ष के दौरान मांस-मदिरा का प्रयोग नहीं करना चाहिए। तर्पण में काले तिल और जो तथा दूध का का प्रोयग करें । पितृ पक्ष में ब्राह्मणों को भोजन करवाएं । इस अवधि में भूलकर भी कुत्ते, बिल्ली, और गाय को भगानाया हानि नहीं पहुंचानी चाहिए |
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. दयानन्द शास्त्री ने बताया की अगर आपके पूर्वज या पितर आपसे खुश हैं, तो दुनिया कि कोई ताकत आपका बाल भी बांका नहीं कर सकती और अगरवो नाराज़ हो गए तो पूरे परिवार का सर्वनाश हो जाता है। पितर का मतलब आपके पूर्वज और श्राद्ध का मतलब श्रद्धा। अपने पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक सम्मान करना ही श्राद्ध होता है। ऐसा कहा जाता है कि मरणोपरांत भी आत्मा भटकती रहती है। उसी आत्मा को तृप्त करने के लिये तर्पण किया जाता है। की संतानें जौं और चावल का पिंड देते हैं। कहा जाता है कि इस दौरान हमारे पूर्वज कौए का रूप धारण कर के आते हैं और पिंड लेकर चले जाते हैं। श्राद्ध के वक्त लोग ब्राह्मणों को भोजन कराने के साथ साथ दानऔर भंडारे भी करते हैं।
साल 2018 में पितृ-पक्ष 24 सितंबर 2018 सोमवार से शुरू हो रहा है. यह 8 अक्टूबर 2018 सोमवार तक रहेगा ।
यहां देखें तिथियों की पूरी सूची और जानें, किस दिन कौन सा श्राद्ध है
माना जाता है जो लोग पितृ-पक्ष में अपने पूर्वजों का तर्पण आदि नहीं कराते है उन्हें पितृ दोष को झेलना पड़ता है। इसलिए हिन्दू धर्म में पितरों की आत्मा की शांति के लिएतर्पण आदि करने का विधान है। लेकिन अगर फिर भी किसी को पितृ दोष लग जाता है तो उससेमुक्ति पाने का सबसे आसान उपाय है पितृ-पक्ष में पितरों का श्राद्ध। श्राद्ध करके पितृ ऋण से मुक्ति पाई जा सकता है। वर्ष 2018 में पितृ-पक्ष 24 सितंबर 2018 सोमवार से प्रारंभ होकर 08 अक्टूबर 2018 सोमवार तक रहेगा। 2018 में श्राद्ध की सभी दिनांक नीचे विस्तार से बताई गयीं हैं--
24 सितंबर 2018 सोमवार पूर्णिमा श्राद्ध
25 सितंबर 2018 मंगलवार प्रतिपदा श्राद्ध
26 सितंबर 2018 बुधवार द्वितीय श्राद्ध
27 सितंबर 2018 गुरुवार तृतीय श्राद्ध
28 सितंबर 2018 शुक्रवार चतुर्थी श्राद्ध
29 सितंबर 2018 शनिवार पंचमी श्राद्ध
30 सितंबर 2018 रविवार षष्ठी श्राद्ध
1 अक्टूबर 2018 सोमवार सप्तमी श्राद्ध
2 अक्टूबर 2018 मंगलवार अष्टमी श्राद्ध
3 अक्टूबर 2018 बुधवार नवमी श्राद्ध
4 अक्टूबर 2018 गुरुवार दशमी श्राद्ध
5 अक्टूबर 2018 शुक्रवार एकादशी श्राद्ध
6 अक्टूबर 2018 शनिवार द्वादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर 2018 रविवार त्रयोदशी श्राद्ध, चतुर्दशी श्राद्ध
8 अक्टूबर 2018 सोमवार सर्वपितृ अमावस्या, महालय अमावस्या
हिंदुओं में श्राद्ध पितरों का सबसे पड़ा पर्व माना जाता है। पूर्णिमा से अमावस्या तक यह 16 दिन का होने से इसे सोलह श्राद्ध कहते हैं। लेकिन तिथियां घटने-बढ़ने के साथ इसके दिन कम-ज्यादा होते हैं।
उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. दयानन्द शास्त्री ने बताया की श्राद्ध में हमारे पितृ प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं। इसमें खरीदी से कोई नुकसान नहीं होता है। इस दौरान श्राद्ध करने का सही समय--
कुतुपमुहूर्त : 11:48 से 12:36 तक
रौहिणमुहूर्त : 12:36 से 13:24 तक
अपराह्नकाल : 13:24 से 15:48 तक