जानिए गणेश चतुर्थी कैसे मनाते है

जानिए गणेश चतुर्थी कैसे मनाते है

गणेश चतुर्थी उत्सव की तैयारियाँ एक महीने या एक हफ्ते पहले से शुरु हो जाती है । अत्यधिक कुशल कलाकार और कारीगर गणेश चतुर्थी पर पूजा के प्रयोजन के लिए भगवान गणेश की विविध कलात्मक मिट्टी की मूर्तियों का निर्माण करने लगते हैं। पूरा बाजार गणेश की मूर्तियों से भरा होता है। सारा बाजार अपने पूरे जोरो से गति पकडता है। यह देखकर बहुत अच्छा लगता है जैसे बाजार में सब कुछ इस बडे हिन्दू त्यौहार का स्वागतकर रहा हो। प्रतिमाओं को एक असली रूप देने के लिए उन्हें कई रंगों का उपयोग करके सजाया जाता हैं।
कैसे करें सामूहिक (समुदाय) गणेश महोत्सव समारोह की तैयारियों -
देशभर में सभी समुदाय के लोग रुपयों के योगदान और संग्रह के द्वारा विशिष्ट क्षेत्र में पंडाल तैयार करते है। समुदाय के लोग पूजा करने के लिए गणेश जी की भव्यप्रतिमा लाते है। वे दूसरों की तुलना में अपने पंडाल को आदर्श बनाने के लिये अपने पंडाल को (फूल, माला, बिजली की रोशनी, आदि का उपयोग कर) सजाते है। वे धार्मिक विषयों के चित्रण विषय पर आधारित सजावट करते हैं। मंदिरों के पुजारी शॉल के साथ लाल या सफेद धोती में तैयार होते है। वे मंत्रो का जाप करते है और प्रार्थना करते है । प्राण प्रतिष्ठा और सदोपचार (अर्थात् श्रद्धांजलि अर्पित करने का तरीका) की धार्मिकक्रिया होती है। भक्त नारियल, मोदक, गुड़, दूब घास, फूल, लाल फूल माला आदि, सहित भगवान के लिए विभिन्न प्रकार की चीजों की भेंट चढाते है। भक्त पूरी प्रतिमा के शरीर के पर कुमकुम और चंदन का लेप लगाते हैं।
एक बड़ा अनुष्ठान समारोह हर साल आयोजित किया जाता है। लोग, मंत्रों का जापभक्ति गीत, उपनिषद से गणपति अथर्व-सहिंता, वेदऋग्वेद से सस्वर भजन, नारद पुराण से गणेश स्तोत्र और भी कई पाठ पूरे समारोह के दौरान किये जाते है । लोग इस त्यौहार को उनकी मान्यताओं, रीति-रिवाजों और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार अलग अलग तरीकों से मनाते हैं । सभी अनुष्ठानों गणपति स्थापना (अर्थात् मूर्ति स्थापित करना) से लेकर गणपति विसर्जन (अर्थात् मूर्ति का विसर्जन) तक में एक बहुत बडी भीड समारोह का हिस्सा बनने और पूरे वर्ष के लिये बुद्धि और समृद्धि का आशीर्वाद पाने के शामिल होती है।
ऐसे मनाए घर पर समारोह -
गणेश चतुर्थी पूरे भारत में मनायी जाती है, हालांकि यह महाराष्ट्र में साल के सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार के रुप मंब मनाया जाता है। बहुत से परिवार इस त्यौहार को छोटे स्तर पर सभी रस्मों को समान ढंग से करके अपने घर में मनाते है। परिवार का एक सदस्य गणेश जी की छोटी या बडी मूर्ति (पसन्द के अनुसार) घर लाकर घर के मन्दिर या घर के बीच या किसी बडे खुले स्थान पर मूर्ति की स्थापना करते है। परिवार के सभी सदस्य विसर्जन तक दोनों समय सुबह जल्दी उठकर और शाम को एक साथ गणेश जी की प्रतिमा की पूजा करते है। लोग प्रार्थना करते है, भक्ति गीत, नृत्य, हरी घास के फूल, फल, घी दीया, मुलायम घास का गुच्छा (दूब, एक 21 सूत या एक ऐसा सूत जिसके 3 या 5 गुच्छें हो), मिठाई, मोदक, धूप-बत्ती, कपूर, आदि अर्पित करते है।
लोग दोनों समय पूजा करते है (मुख्यतः 21 बार), और अपनी पूजा बडी आरती के साथ समाप्त करते है। महाराष्ट्र में लोगों द्वारा विशेष रुप से सन्त रामदास द्वारा 17 वीं शताब्दी में लिखी गयी आरती (पूजा के अन्त में) गायी जाती है। घरेलू समारोह 1, 3, 5, 7 या 11 दिनों के बाद नदी, समुद्र आदि की तरह बड़े पानी के स्रोत में प्रतिमाके विसर्जन पर समाप्त होता है। भारी भीड के कारण उत्पन्न समस्याओं से दूर रहने केलिये, लोग धीरे-धीरे पानी के बडें स्त्रोतो पर विसर्जन के लिये जाने से बचने लगे है। लोग पानी की एक बाल्टी या टब में गणपति विसर्जन करते हैं और बाद में वे बगीचेमें इस मिट्टी का उपयोग कर लेते है।
गणेश महोत्सव के लिए तैयारी -
लोग कम से कम एक महीने या एक सप्ताह पहले से इस समारोह की तैयारियाँ शुरू करते हैं। वे भगवान गणेश का सबसे प्रिय व्यंजन मोदक (मराठी में) बनाते है। इसके विभिन्न भाषाओं के कारण अनेक नाम है जैसे: कन्नङ में कडुबु या मोदक , मलयालम में को जहा कट्टा और मोदकम, तेलुगु में मोदकम् और कुडुमु और तमिल में कॉज़हक़त्तई और मोदगम। मोदक चावल के आटे या गेहूं के आटे में नारियल, सूखे मेवे, मसालों और गुड़ के मिश्रण का उपयोग कर पूजा के लिए विशेष रूप से तैयार किया जाता है। कुछ लोग इसे भापके द्वारा और कुछ इसे पकाकर बनाते है। मोदक की तरह एक अन्य पकवान करन्जी कहा जाता है, लेकिन यह आकार (अर्धवृत्ताकार आकार) में भिन्न है। 21 की संख्या में गणेश जी को मोदक की भेंट करने की एक रस्म है।