विश्व विरासत दिवस पर हुई संगोष्ठी, ऐतिहासिक दरवाजों को जनता क्लिनिक के रूप में उपयोग लिया जाए: इंटैक

विश्व विरासत दिवस पर हुई संगोष्ठी, ऐतिहासिक दरवाजों को जनता क्लिनिक के रूप में उपयोग लिया जाए: इंटैक

उदयपुर, 18 अप्रेल/“ऐतिहासिक इमारतें हमारी संस्कृति की विरासतें है जो ना सिर्फ हमें हमारे पिछले भौतिक युग से रूबरू करवाती है बल्कि आम लोगों को बीते युग के शिल्प सौंदर्य से अवगत करवाने के साथ ही उसके उत्तराधिकारियों को आर्थिक लाभ भी प्रदान करती है। हाल ही में स्मार्ट सिटी के द्वारा शहर के ऐतिहासिक दरवाजों पर 36 करोड़ रूपए खर्च कर जीर्णोद्धार किया गया है। जिसका तात्पर्य है “पूर्व कि स्थिति में लाना”। किंतु जीर्णोद्धार के साथ ही इनका संरक्षण भी जरूरी है। संरक्षण से तात्पर्य उन्हें जीवित रखना है, इन्हें बनाए रखना है। तथा इन सांस्कृतिक विरासतों का जीवित रखने के लिए जरूरी है कि पूर्व की तरह वर्तमान में भी इनका उपयोग हो। उल्लेखनीय है कि रियासत काल में इन दरवाजों में हमेशा सुरक्षा प्रहरी रहा करते थे।“
विश्व विरासत दिवस के अवसर पर इंटैक भारतीय सांस्कृतिक निधि, द्वारा आयोजित वर्चुअल संगोष्ठी में ये विचार उभर कर आए। इंटैक की स्थानीय इकाई के संयोजक प्रो.बी.पी.भटनागर ने कहा कि किसी भी ऐतिहासिक विरासत का सफल संरक्षण तभी सम्भव है जब उस इमारत का वास्तविक उपयोग किया जाए। तथा ये विरासतें अपने पैरों पर खड़ी हो कर अपने रख रखाव के राजस्व को कमाने की स्थिति में हो। आज राजस्थान पर्यटन में इन्ही विरासतीय किलों, महलों, हवेलियों की महत्वपूर्ण भूमिका है जिन्हें होटलों में तब्दील करके उपयोग लिया जा रहा है ।
मुख्य वक्ता प्रो. महेश शर्मा, (निर्मित विरासत एवं जल संसाधन समन्वयक, इंटैक) ने कहा कि इन विभिन्न दरवाजों के कक्षों में काँच की दीवारों से उन्हें बढिया आकार दिया गया है अतः उनका उपयोग मुख्यमंत्री द्वारा पिछले बजट में घोषित जनता क्लिनिक के रूप में किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री की मंशा थी कि लोगों को अच्छी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएँ उनके घर के नजदीक मिले। ये दरवाजे शहर के अलग अलग क्षेत्रों में स्थित है जहाँ बहुत अधिक मात्रा में आम लोगों की आसान पहुँच है। उन्होंने कहा कि यहाँ पर वाचनालय-पुस्तकालय खोलकर बेहतर उपयोग किया जा सकता है।
वास्तु एवं शहरी विकास समन्वयक सतीश श्रीमाली, अतिरिक्त मुख्य नगर नियोजक राजस्थान तथा प्रो. महेश शर्मा ने कहा की गुलाब बाग में सरस्वती भवन के संरक्षण के लिए शहर के विशेषज्ञों से राय ले कर काम संरक्षण किया जाए। उन्होंने बताया कि ग्रे स्टोन के पिलर्स को वापस घुटाई कर मजबूत किया जाना जरूरी है। श्रीमाली ने सिटी स्टेशन के सामने बची हुई शहर कोट को संरक्षित करने की भी मांग की ताकि अतिक्रमण नहीं हो। विशेष आमंत्रित सदस्य ललित नलवाया पूर्व मंडल पुस्तकालयाध्यक्ष, सरस्वती भवन लाइब्रेरी, गुलाब बाग व इंटैक के सहसंयोजक गौरव सिंघवी ने शहर के विरासत संरक्षण के निर्णयों में पूर्व की तरह इंटैक को सम्मिलित करने की माँग की।
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