पंजीरी प्रसाद ही नहीं वरन् औषधि भी है - वैद्य औदिच्य

पंजीरी प्रसाद ही नहीं वरन् औषधि भी है - वैद्य औदिच्य

उदयपुर, 22 अगस्त/जन्माष्टमी के दिन हर कृष्ण मंदिर एवं प्रत्येक घर में कान्हा के जन्म के उपलक्ष में प्रसाद के रूप बनाई जाने वाली पंचजरी (पंजीरी) केवल प्रसाद ही नहीं वरन् एक आयुर्वेदिक औषधि भी है जो वर्षा ऋतु के दौरान होने वाले वात रोग एवं अम्लपित (एसीडिटी) रोग के निवारण के लिए कारगर है।
उदयपुर शहर के आयुर्वेद विशेषज्ञ वैद्य शोभालाल औदिच्य ने बताया कि इसमें काम आने वाले पांच तत्वों पर झीरी होने के कारण इसे पंचजरी या पंजीरी जो सभी जीरी के समान है। इसमें धनिया, सौंफ, जीरा, अजवाइन और सुआ (सोया) की समान मात्रा का अलग-अलग चूर्ण बनाकर उसमें बुरा शक्कर एवं शुद्ध देशी घी मिलाकर तैयार किया जाता है और इसका सेवन करने से स्वास्थ्य लाभ मिलता है। उन्होंने बताया कि जन्माष्टमी से लेकर एक माह तक लगभग 6 ग्राम से लेकर 10 ग्राम तक पंजेरी का निरंतर सेवन भूखे पेट किया जा सकता है। इसके सेवन से वर्षा ऋतु के दौरान होने वाले वात रोग एवं अम्लपित (एसीडिटी) रोग पर नियंत्रण किया जा सकता है।
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