किसानों की आय दोगुना करने के लिए पारम्परिक एवं आधुनिक प्रोद्योगिकियों के समन्वित प्रयोग पर राज्यपाल का जोर

किसानों की आय दोगुना करने के लिए पारम्परिक एवं आधुनिक प्रोद्योगिकियों के समन्वित प्रयोग पर राज्यपाल का जोर

जयपुर, 10 जुलाई। राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री कल्याण सिंह ने कहा है कि हमारे समाज का सर्वोत्तम कार्य कृषि हैं। हम सभी को मिल कर इस कार्य में भागीदारी निभानी है। किसानों को कृषि की आधुनिक तकनीक बतानी होगी। कृषि ज्ञान और विज्ञान का विषय है। किसानों के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की कमी चिंता का विषय है। श्री सिंह ने कहा कि अच्छे बीजों की उपलब्धता हम सभी के लिए एक चुनौती है। इसके लिए सभी संस्थागत स्तरों पर समन्वित प्रयास आवश्यक है। राज्यपाल श्री सिंह का कहना था कि अधिक उपज एवं कम समय में पकने वाली जींसों के बीजों का प्रचार सामुदायिक विकास केन्द्रों के माध्यम से किया जाना चाहिए। पंचायतों एवं सहकारी समितियों के द्वारा उच्च गुणवत्ता वाले बीजों की वितरण व्यवस्था को विश्वसनीय एवं सुनिश्चित करना आवश्यक है।
राज्यपाल श्री सिंह बुधवार को जोबनेर के विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित श्री कर्ण नरेन्द्र कृषि विश्वविद्यालय के द्वितीय दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल श्री सिंह ने समारोह में 21 छात्राओं और 10 छात्रों को पदक व प्रमाण पत्रा प्रदान किये। राज्यपाल ने इस अवसर पर 46 छात्रों और 8 छात्राओं को पीएचडी. की उपाधि भी प्रदान की।
राज्यपाल श्री कल्याण सिंह ने कहा कि मैं किसान का बेटा हूँ। अपने हाथों से खेती की है। फावडा चलाया है। हल चलाकर खेत जोते हैं। कृषि के मायने क्या होते हैं। यह एक किसान ही समझ सकता है। राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्र के कृषि क्षेत्रा के समक्ष उपस्थित चुनौतियों का सामना करने तथा वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए पारम्परिक एवं आधुनिक प्रौद्योगिकियों की समन्वित क्षमता का सदुपयोग करना आवश्यक है। कृषकों के आर्थिक उन्नयन तथा जीवन स्तर को ऊॅंचा उठाने के लिए कृषि वैज्ञानिकों को निरन्तर प्रयास करने और राष्ट्र को समृद्धिशाली बनाने में योगदान देना होगा।
राज्यपाल श्री सिंह ने कहा कि हरित क्रांति से देश में फसलों के क्षेत्राफल, कृषि उत्पादन तथा उत्पादकता में वृद्धि के फलस्वरूप आत्मनिर्भरता हासिल हुई है। वर्तमान में फल एवं सब्जी उत्पादन में सार्थक वृद्धि एवं गुणवत्ता में सकारात्मक उन्नयन हुआ है। किन्तु किसानों को जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों से काफी नुकसान उठाना पड़ता है। श्री सिंह ने समन्वित मौसम प्रबन्धन एवं हाईटैक तकनीक के साथ-साथ इसके प्रति किसानों की सजगता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। राज्यपाल ने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों को मुश्तैदी के साथ कार्य करना होगा और किसानों को समय से पूर्व सावचेत करना होगा।
राज्यपाल श्री कल्याण सिंह ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है। हमारी अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। हमारी जनसंख्या का दो तिहाई हिस्सा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कृषि पर निर्भर करता है। हमारे देश की राष्ट्रीय आय का लगभग छठा भाग कृषि से आता है। बढ़ती हुई आबादी व जलवायु परिवर्तन को ध्यान में रखते हुये कृषि भूमि की उत्पादकता बढ़ाने पर कृषि वैज्ञानिकों को निरन्तर शोध करने की आवश्यकता हैं । कुलाधिपति श्री सिंह ने कहा कि जैविक खेती, जल बचत के लिये जल स्वावलम्बन योजना तथा किसानों को नवीनतम कृषि तकनीकी, मृदा जाँच तथा उर्वरकों के समुचित उपयोग के प्रशिक्षण के लिये राज्य सरकार द्वारा उठाए गये आवश्यक कदम सराहनीय है। कृषि प्रौद्योगिकी को कृषक समाज तक पहुंचाने में हमारे कृषि विज्ञान केन्द्र सतत क्रियाशील हैं। इन कृषि विज्ञान केन्द्रों के कार्यों को ओर अधिक गति देने की आवश्यकता है।
राज्यपाल श्री कल्याण सिंह ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं जन-कल्याण के लिए आवश्यक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय पाठ्यक्रमों को अद्यतन करने व ज्ञान-विज्ञान एवं तकनीक के नए आयामों को सम्मिलित करते रहने की आवश्यकता प्रतिपादित की। उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों का आह्वान किया कि वे समय की मांग के अनुसार किसानों के लिए उपयोगी शोध को बढ़ावा दें, जिससे हम समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभा सकें।
समारोह में विधायक श्री अलोक बेनीवाल ने छात्रा-छात्राओं को बधाई दी और कृषि के विभिन्न आयामों की जानकारी किसानों तक पहुँचानें की आवश्यकता जताई। विश्वविद्यालय के कुलपति श्री जे.पी.शर्मा ने विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। रजिस्ट्रार श्रीमती अल्का विश्नोई ने समारोह का संचालन किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रबंध मण्डल, अकादमिक परिषद, विभिन्न संकायों के अधिष्ठातागण, शिक्षक, अधिकारी, छात्रा-छात्राएं व अभिभावकगण मौजूद थे।
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