तिल-तिल तड़पती गौ माता की गुहार, श्राप और पाप की भागी महारानी सरकार - रणदीप सिंह सुरजेवाला

तिल-तिल तड़पती गौ माता की गुहार, श्राप और पाप की भागी महारानी सरकार - रणदीप सिंह सुरजेवाला

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता और हरियाणा के कैथल से विधायक रणदीप सिंह सुरजेवाला ने प्रेस वार्ता की उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी कहते थे कि गौ माता जन्मदात्री माता से भी श्रेष्ठ है। जन्म देने वाली माँ तो दो वर्ष बच्चों को दूध पिलाती है, मगर गौ माता तो जीवनपर्यंत।
2013 में भाजपा ने गौसेवा की झूठ पर सरकार बनाई। 2013 के घोषणापत्र में वसुंधरा जी ने साल में 9 माह गौवंश के पालन पोषण हेतु 5 साल में 1750 करोड़ रुपया अनुदान राशि देने का वादा कर डाला, पर गौमाता से किए वादे से भी किया विश्वासघात और छलावा।
वसुंधरा सरकार में गौ माताओं को नहीं, गौ-शालाओं में उनकी मौत को पाला जा रहा है। उनके हक और अधिकार पर डाका डाला जा रहा है। घोटाले की हद यह है कि बेबस-बेज़ुबान गौमाता की दवाईयों में भ्रष्टाचार हुआ, चारे में भ्रष्टाचार हुआ। वो तड़प तड़प कर बारी बारी से दम तोड़ती रही, पर अपनी भूख, प्यास और महामारी का मर्म बताती भी किसे। वो कीचड़ के दलदल में दम तोड़ती रही, पर उसकी चीत्कार सुनता भी कौन। क्या वसुंधरा सरकार ने एक ऐसी व्यवस्था बना डाली जो आकंठ भ्रष्टाचार में डूब गौमाता के हक को भी खा जाना चाहती हो?
2014 से 2018 के बीच महारानी राज में 35,000 गौवंश ने दम तोड़ा
वसुंधरा सरकार के पांच वर्षों में 35000 से अधिक गौवंश ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया। यह अपराध भाजपा सरकार को पाप और श्राप का भागी बनाता है।
वर्ष 2014 में 7,694; 2015 में लगभग 8,000 और 2016 के आते आते लगभग 13,000 गौ माताओं ने महारानी राज में फैली अपराधिक लापरवाही, कुव्यवस्था व भ्रष्टाचार के आगे दम तोड़ दिया। राजस्थान की सबसे बड़ी हिंगोनिया गौशाला जयपुर में महारानी सरकार की सरपरस्ती में, जब हजारों मूक गौमाताएं कीचड़ और दलदल व भूख प्यास की पीड़ा से पल-पल दम तोड़ रही थीं, तो एक भ्रष्टाचारी व्यवस्था उनके हक का दाना पानी खा रही थी व जिम्मेदारियों से आंख चुरा रही थी। सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध हिंगोनिया गौशाला में गौवंश की मौत के कुछ आंकड़े इस प्रकार हैं :
नवंबर 2016 - 1291, दिसंबर 2016 - 981, जनवरी 2017 - 971, फरवरी 2017- 839, मार्च 2017- 964,
अप्रैल 2017-880, मई 2017-1132, जून 2017-1026, जुलाई 2017-1075, अगस्त 2017-1050,
यही नहीं, पूरे प्रदेश में भूख, प्यास, बीमारी, चारे का अभाव व दलदल से मरने वाले गौवंश के सैकड़ों उदाहरण हैं, जैसे :-
1. 27.07.2017-कठमेड़ा गौशाला, जालौर में दलदल में 700 गौमाता तड़पतड़प कर मरीं।
2. अगस्त 2017 - बंधा गौशाला, कोटा में दवाई व चारे के अभाव तथा दलदल में 700 के करीब गौमाता ने दम तोड़ा।
3. अगस्त, 2017 नंदड़ी गौशाला, जोधपुर में दलदल में 15 गौवंश की मौत।
4. 27 जुलाई, 2018 श्री गोपाल गौशाला, सीकर में चारे के अभाव में 20 गौवंश दे दम तोड़ा।
5. 4 अगस्त, 2018, सरकार के ट्रांज़िट कैटल कैंप, भरतपुर में चारे के अभाव व कीचड़ में 10 गौमाता मरीं।
6. 9 अगस्त, 2018 हनुमानगढ़ गौशाला में 28 गौवंश की मौत।
7. समाचार पत्रों के अनुसार साल, 2018 में हिंगोनिया गौशाला में 1000 के करीब गौवंश ने दम तोड़ा।
गद्दी पर बैठने के बाद महारानी 1,750 करोड़ की गाय अनुदान राशि के 2013 के वादे को तो भूल गईं। जब गद्दी हिली तो साल, 2016-17 में शराब व स्टांप ड्यूटी पर सरचार्ज लगाया व 237 करोड़ कमाया, पर गौमाता पर खर्च वह भी पूरा नहीं हुआ। क्या वसुंधरा जी-मोदी जी आज बताएंगे कि 1750 करोड़ रु. में से 2562 चिन्हित गौशालाओं को कितना पैसा लोककल्याण के लिए दिया? यहीं उनकी झूठी गौसेवा की पोल खुल जाएगी।
गौ माता की दवाओं का नहीं इंतजाम, भ्रष्टाचार को दिया अंजाम :
सरकार द्वारा संचालित गौशाला परिसरों में व्यापक भ्रष्टाचार की कहानी का अब सनसनीखेज खुलासा हो गया है। हिंगोनिया गौशाला का जुलाई, 2016 से अक्टूबर, 2016 तक अगर दवाईयों व इलाज की व्यवस्था का अवलोकन करें, तो चौंकानेवाले तथ्य सामने आते हैं कि बीमार व लाचार गायों के लिए प्रदेश की सबसे बड़ी गौशाला में न दवाई उपलब्ध थी, न एंटीबायोटिक्स, न इंजेक्शन, न ड्रिप, न औजार, न पट्टी और न ही किसी प्रकार का उपचार। जुलाई, 2016 से अक्टूबर, 2016 तक के हिंगोनिया के गौशाला के स्टॉक रजिस्टर की प्रतिलिपि ।1 से ।4 संलग्न है।
क्या महारानी सरकार अगले 12 घंटे में हिंगोनिया गौशाला सहित सभी सरकारी गौशालाओं के स्टॉक रजिस्टर को सार्वजनिक करने का साहस दिखाएगी, ताकि पाखंडी गौभक्तों की असली सच्चाई राजस्थान की जनता के समक्ष आ सके? क्या वसुंधरा सरकार 5 साल में 2562 रजिस्टर्ड गौशालाओं को दी गई अनुदान राशि को सार्वजनिक करने का साहस दिखाएगी?
क्या यह सही नहीं कि राजस्थान हाईकोर्ट ने अप्रैल, 2017 में वसुंधरा सरकार को हिंगोनिया गौशाला में टीनशेड व बाड़े बनाने का निर्देश दिया था, परंतु डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी गौवंश विरोधी वसुंधरा सरकार ने कोई कार्यवाही नहीं की? क्या यह सही नहीं कि हिंगोनिया गौशाला में 13,000 के करीब गौवंश की मृत्यु के बाद बनाई गई एसीडी की रिपोर्ट आज तक नहीं आई, क्योंकि उससे यह साबित हो जाता कि गाय के चारे के झूठे बिल बनाए गए 10 किलोग्राम प्रति गाय के, परंतु चारा उपलब्ध ही नहीं हुआ, तथा चारा ट्रांसपोर्ट करने वाले ट्रकों के नंबर असली में मोटरसाइकलों के निकले। क्यों इस गौ चारा घोटाले की जाँच आज तक पूरी नहीं हुई?
2013 में 665 वादे करने वाली वसुंधरा सरकार ने गौमाता सहित राजस्थान की जनता से चार सौ बीसी की है। इसीलिए 2018 के भाजपाई घोषणापत्र में 2013 के वादों से भी मुंह चुरा लिया। गौ माता के नाम पर पाखंड, ढोंग और आडंबर करने वाली वसुंधरा-मोदी सरकारों से 7 करोड़ राजस्थानी जवाब मांगते हैं अैर कह रहे हैं | गौमाता गुहार लगाती रही, भाजपा फर्जी इश्तिहार छपवाती रही
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