राणी रुपादे मन्दिर पालिया में चतुर्थ वर्ष धर्मसभा का आयोजन

राणी रुपादे मन्दिर पालिया में चतुर्थ वर्ष धर्मसभा का आयोजन

जालोर,11 सितम्बर। मृत्युभोज व विभिन्न अवसरो पर अफीम -डोडा जैसे मादक पदार्थो का प्रयोग हमारे समाज को खोखला कर रहे है, ऐसी कुरीतियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना होगा तभी समाज गुणवान बनेगा और प्रगति करेगा - ये उद्गार श्री राणी भटियाणी मन्दिर संस्थान जसोल के अध्यक्ष रावल श्री किशन सिंहजी जसोल ने पालिया स्थित श्री राणी रुपादे मन्दिर परिसर में आयोजित चतुर्थ वर्ष धर्म सभा में कहे।
रावल श्री किशन सिंहजी जसोल ने कहा कि मृत्युभोज व अफीम-डोडा का प्रचलन भयंकर बुराई है और वर्तमान युग में इसका समर्थन व आयोजन अज्ञानता व मूर्खता है। आज समाज षिक्षित होने के नाते ऐसी कुरीतियों को तर्क व बुद्धि की कसौटी पर कसे और हर सिरे से मृत्युभोज व अफीम-डोडा के प्रयोग की कुप्रथा को नकारे।
किसी भी धर्मशास्त्र में मृत्युभोज का समर्थन नही किया गया है। तथा महान संतो एवं विद्धानो ने भी मृत्युभोज को न केवल घृणित व वर्जित माना है बल्कि इसके मुक्ति को ही जीवन का नैतिक धर्म बताया है।
ऐसे में हमारा कर्तव्य बनता है कि शास्त्रो को पढे और समझे, विद्धान संतो व विद्धानो के कथनो का अनुसरण करे ताकि मृत्युभोज व अफीम-डोडा आदि मादक पदार्थ की कुरीतियॉ हमारे समाज से दूर हो, जो दिनोदिन दीमक की तरह समाज को खोखला कर रही है।
रावल श्री किशन सिंहजी ने इस अवसर पर रावल श्री मल्लीनाथजी एवं राणी रुपादेजी के बताये हुए धर्म, न्याय व सत्य के मार्ग पर चलने का आह्यवान करते हुए कहा कि उन्होने आज से सात सौ वर्ष पहले जो संदेश दिया था इसकी वर्तमान युग में महती आवश्यकता है।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में साधु संतो एवं अतिथियो ने रावल श्री मल्लीनाथ जी व राणी श्री रुपादे जी की तस्वीर के आगे दीप प्रज्जवन कर विधि पूर्वक कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर जसोल रावलसा श्री किशन सिंहजी, सिणधरी रावल श्री विक्रम सिंहजी, एवं बाड़मेर रावत श्री त्रिभुवन सिंहजी साधु संतो को शॉल, पुष्पहार, श्रीफल एवं भेट देकर सम्मानित किया।
धर्म सभा में सम्बोधित करते हुए राम जन्म भूमि न्यास अयोध्या के अध्यक्ष महन्त श्री नृत्य गोपालदास जी महाराज ने कहा कि रावल मल्लीनाथ व राणी रुपादे संत के रुप में महान विभूतियॅा थी जिन्होने धर्म कि रक्षा की और त्याग व तपोमय जीवन से लोगो को प्रेरणा दी कि धर्म न छोड़े तथा धर्म के मार्ग का अनुसरण ही मनुष्य जीवन की सार्थकता का उद्देश्य है उसकी प्राप्ति में लग जाये। उसके लिए रावल श्री मल्लीनाथजी व राणी श्री रुपादेजी ने अपना जीवन लगा दिया यह वजह है कि आज उनकी गाथा चिरस्मरणीय है और 700 साल बीतने के बाद भी जन-जन उनके प्रति श्रद्धा रखता है व स्मरण करता है।
धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए डॅुगरपुरी मठ चौहटन के महन्त श्री जगदीश पुरी जी महाराज ने कहा कि रावल मल्लीनाथ और राणी रुपादे ऐसे युग में हुए जिसमें रामदेवजी हडबुजी पाबुजी व जैसल तोरल जैसे सन्त थे और उस युग कि जो विषम परिस्थियों थी उस परिस्थितियो में मानव मात्र के मार्ग दर्शन बन कर सही रास्ता बताया।
इस अवसर पर चन्द्र घंटेश्वर महादेव मठ के महन्त श्री नारायण भारती महारज ने कहा कि मनुष्य जीवन अनमोल है तथा यह देवताओ के लिए भी दुर्लभ है क्योकि 84 लाख योनियो मं भटकने के बाद इस मनुष्य जीवन की प्राप्ति होती है और इसमें सार्थकता तभी है जब मनुष्य सेवा के भाव को अपनाते हुए आत्म कल्याण की ओर बढे।
और यह तभी सम्भव है जब मनुष्य मन, वचन, बुद्धि ओर करम से शुद्ध और पवित्र हो तथा सेवा के माध्यम को अपनाये।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए समदड़ी मठ के महन्त मृत्युजंयपुरी जी महाराज ने रावल मल्लीनाथ व राणी रुपादे के जीवन चरित्र को आज के युग कि आवष्यकता बताई तथा सभी से आग्रह किया कि वह रावल मल्लीनाथ व राणी रुपादे ने आदर्ष स्थापित किये उनके बताये हुए मार्ग व पदचिन्हो पर चलने से प्रत्येक व्यक्ति का कल्याण ही कल्याण होता है और मनुष्य जीवन में सुखी होता है कार्यक्रम में भरड़कोट महंत सेवानाथ जी भी उपस्थित थे।
कार्यक्रम के आरम्भ में सभी का स्वागत करते हुए बाड़मेर के रावत श्री त्रिभुवन सिंह जी ने कहा कि रावल मल्लीनाथ और राणी रुपादे जिस कुल ओर क्षेत्र में पेदा हुए है वह अपने आप में गर्व करने योग्य है। उन्होन अपने जीवन में जिस विचार धारा का प्रसार किया व हर वर्ग के सम्प्रदाय व हर जाति ने उसका अनुसरण किया और आज भी रावल मल्लीनाथ व राणी रुपादे न सिर्फ याद करते है बल्कि उनके बताये हुए मार्ग पर चलते हुए श्रद्धा पूर्वक याद करतें है, यही महान साधु सन्तो की पहचान है। हमें उनके बताये हुए मार्ग व आदर्शों पर चलने की प्रेरणा लेनी चाहिए ओर इस स्थल पर इस समारोह में आकर के अपने जीवन की बुराइयो ओर दुर्गुणां को छोड़ने का संकल्प लेना चाहिए। इस अवसर पर प्रतिभाओ के रुप में जकार्ता में आयोजित एशियाई गेम्स में घुड़सवारी प्रतिस्पर्धा में रजत पदक विजेता जितेन्द्र सिंह भाटी, उनके कोच गुलाब सिंह, युवा उद्यमी आजाद सिंह बाड़मेर, डॉ. चतुर्भुजसिंह राठौड़, डॉ.नारायण सिंह, डॉ हितेन्द्र सिंह, डॉ. महिपाल सिंह राठौड़, समाजसेवी व व्यवसायी उदयसिंह, गुलाबसिंह डडाली, लेखक मोहनलाल गहलोत, मन्दिर संस्थान पर सराहनीय सेवा देने वाले कर्तव्यनिष्ठ कर्मचारी विजयसिंह जोधा, भोपाल सिंह मलवा, तथा मन्दिर निर्माण मे लगे कारीगर अमराराम देवासी को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मोहनलाल गहलोत लिखित पुस्तक रावल माल रुपादे राणी का विमोचन किया गया।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए चन्दनसिंह चान्देचरा ने रावल श्री मल्लीनाथ जी व राणी श्री रुपादेजी के जीवन चरित्र पर ऐतिहासिक सन्दर्भ के साथ उनके आध्ययत्मिक जीवन व दार्शनिकता पर प्रकाश डाला।
इसमें पूर्व सोमवार रात्रि में दूधेश्वर नाथ महादेव मठ के महन्त व जूना खेड़ा के अतर राष्ट्रीय पूज्य श्री नारायण गिरीजी महाराज व श्री महन्त सेवा गिरीजी महाराज, कनाना मठ के महन्त श्री परशुराम गिरीजी महाराज व परेऊ मठ के महन्त श्री ओंकार भारतीजी महाराज, मेवानगर के महन्त श्री अमरनाथ जी के सानिध्य में भव्य भजन संध्या का आयोजन किया गया । जिसमें भजन गायक सिमरथाराम भील, भवरनाथ केसुम्बला, हेमाराम जसोल, धनाराम देवासी, जीवाराम देवासी, कालुराम देवासी आदि ने रावल श्री मल्लीनाथ जी एवं राणी श्री रुपादेजी के जीवन चरित्र पर आधारित भजनों की सुमधुर प्रस्तुतिया देकर श्रोताओं को भक्तिभाव से भावविभोर कर दिया। इस अवसर पर इस आयोजन मे भोजन प्रसादी दानदाता श्री गुलाब सिंह जी डडाली की तरफ से की गई।
इस आयोजन में समस्त व्यवस्थाये और प्रबन्धन का उतरदायित्व कुं. हरीशचन्द्र सिंह जसोल के मार्गदर्षन में श्री राणी भटियाणी मन्दिर संस्थान के कर्मचारियो एवं स्वयं सेवको ने निभाया।
इस आयोजन में लूणा रावजी श्री रामसिंह जी, पोकरण विधायक श्री शैतान सिंहजी सहित बाड़मेर जैसलमेर जोधपुर शहर, जालौर व पाली आदि जिलो से हजारो श्रद्धालुओ ने शिरकत की।
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