पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा द्वारा राज्य स्तरीय डिकॉंय ऑपरेशन

पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा द्वारा राज्य स्तरीय डिकॉंय ऑपरेशन

जयपुर 8 अगस्त। महानिदेशक पुलिस श्री कपिल गर्ग के निर्देश पर पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा द्वारा पुलिस थानों पर प्रकरण दर्ज नहीं करने व परिवादियों से व्यवहार संबंधी मामलों का डिकॉय ऑपरेशन कर परीक्षण किया गया। इन 7 में से 5 मामलों में प्रकरण दर्ज नहीं करने व उचित व्यवहार नहीं पाये जाने पर संबंधित थानाधिकारियों से स्पष्टीकरण लिया जा रहा है। स्पष्टीकरण के पश्चात् नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, सतर्कता श्री गोविन्द गुप्ता ने बताया कि सतर्कता शाखा के पुलिस अधिकारियों के नेतृत्व में सात दलों का गठन किया गया था। गठित दलों द्वारा रेन्डमली पुलिस थाना पीलीबंगा (जिला हनुमानगढ़), पुलिस थाना बौंली (जिला सवाईमाधोपुर), पुलिस थाना रामगंज मण्ड़ी (जिला कोटा ग्रामीण), पुलिस थाना कोतवाली (जिला पाली), पुलिस थाना फतेहपुर कोतवाली (जिला सीकर), पुलिस थाना गोटन (जिला नागौर) तथा पुलिस थाना संजय सर्किल, जयपुर (उत्तर) का चयन कर 5 जनवरी को उक्त पुलिस थानों पर जाकर वाहन चोरी का प्रकरण दर्ज कराने का प्रयास किया गया।
श्री गुप्ता ने बताया कि उक्त कार्रवाई के दौरान परिवादी के रूप में गये सतर्कता दलों का मिश्रित अनुभव रहा। पुलिस थाना पीलीबंगा में कार चोरी की सूचना पर उदासीन रवैया अपनाते हुये कार की तलाश हेतु तत्काल कोई कार्यवाही नहीं की गई तथा प्रकरण भी पंजिबद्व नहीं किया गया। उन्होनें बताया कि पुलिस थाना बौंली में मोटर साईकिल चोरी की सूचना पर वायरलैस द्वारा सन्देष प्रसारित कर दिया गया, परन्तु प्रकरण दर्ज करने में टाल मटोल की गई। प्रकरण विलम्ब से दर्ज तो किया गया, परन्तु अपेक्षित व सही अनुसंधान कार्यवाही नहीं की गई।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस सतर्कता ने बताया कि पुलिस थाना रामगंज मण्ड़ी में एक पुलिस कानिस्टेबल द्वारा परिवादी के रूप में गये सतर्कता दल के साथ बहुत अच्छा व्यवहार करते हुये रिपोर्ट लिखने हेतु कागज व पैन उपलब्ध कराये गये तथा स्वयं ने ही बताये अनुसार रिपोर्ट लिखी। थाने पर उपस्थित उप निरीक्षक द्वारा सतर्कता दल को पुलिस थाने के वाहन से घटनास्थल पर ले जाकर घटना के विषय में जानकारी प्राप्त की गई और सतर्कता दल को बस स्टैण्ड़ तक छोड़ा भी गया तथा यह कहा गया कि दो-तीन दिन तक तलाश करने के बाद मोटर साईकिल नहीं मिलने पर प्रकरण दर्ज करेगें। पुलिस थाना पाली कोतवाली में ड्यूटी ऑफिसर के रूप में तैनात पुलिस कर्मी का व्यवहार टालने वाला रहा तथा उसने बिना मौका देखे ही घटनास्थल अन्य थाने का होना बताकर सतर्कता दल को दूसरे थाने पर भिजवा दिया। वापस उसी थाने पर जाने पर मोटर साईकिल तलाश हेतु वायरलैस मैसेज प्रसारित किया गया तथा घटनास्थल पर जाकर सी.सी.टी.वी. फुटेज भी देखे गये, परन्तु दो-तीन दिन तक तलाश करने का कहते हुये प्रकरण दर्ज नहीं किया गया।
पुलिस थाना फतेहपुर कोतवाली के थानाधिकारी द्वारा सतर्कता दल को दो तीन दिन बाद आने के लिये कहा। दल द्वारा रिपोर्ट की प्राप्ति रसीद मांगे जाने पर थानाधिकारी ने आवेष में आकर मोटर साईकिल चोरी का सबूत मांगा और अभद्र व्यवहार भी किया। चौथे प्रयास में दल द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट के स्थान पर अन्य रिपोर्ट लिखवा कर प्रकरण दर्ज किया, परन्तु अपेक्षित अनुसंधान कार्यवाही प्रारम्भ नहीं की। पुलिस थाना गोटन में मोटर साईकिल चोरी की सूचना देने पर पुलिस थाना द्वारा अपेक्षित तलाश कार्यवाही तो की गई, परन्तु चोरी का प्रकरण दो दिन बाद दर्ज करने के लिये कहा गया। पुलिस थाना संजय सर्किल में मोटर साईकिल चोरी की सूचना देने पर संबंधित पुलिस कर्मियों के द्वारा 3 दिन बाद प्रकरण दर्ज कराने के लिये कहा गया। थानाधिकारी से मिलने पर थानाधिकारी ने बाद में रिपोर्ट दर्ज करने के लिये कहा।
थानाधिकारी फतेहपुर कोतवाली को फील्ड़ पदस्थापन से तत्काल हटाने के निर्देश
श्री गुप्ता ने बताया कि इस पूरे अभियान में यह देखा गया कि पुलिस थानों पर दो तीन दिन में वाहन नहीं मिलने पर प्रकरण दर्ज करना बताया तथा तत्काल अभियोग दर्ज करने में उदासीनता प्रदर्षित की। पुलिस थाना फतेहपुर कोतवाली के अलावा अन्य पुलिस थानों पर उपस्थित पुलिस कर्मियों द्वारा आम परिवादी के रूप में गये सतर्कता दल के साथ उचित व्यवहार किया गया। थानाधिकारी फतेहपुर कोतवाली को फील्ड़ पदस्थापन से तत्काल हटाने हेतु संबंधित महानिरीक्षक पुलिस को निर्देषित किया गया है।
पुलिस मुख्यालय द्वारा वाहन चोरी की सूचना के उपरान्त तलाश हेतु समुचित कार्यवाही नहीं करने तथा तत्काल प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान प्रारम्भ नही करने को गम्भीरता से लेकर संबंधित पुलिस कर्मियों से स्पष्टीकरण लिया जा रहा है। इसके पश्चात् उनके विरूद्व कठोर अनुशासनात्मक कार्यवाही अमल में लाई जावेगी। पुलिस थानों की कार्य प्रणाली के विषय में इस तरह की प्राप्त शिकायतों का परीक्षण कराने हेतु सतर्कता शाखा द्वारा भविष्य में भी इस प्रकार के अभियानों का संचालन किया जाता रहेगा।
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