कोरोना वैश्यिक महामारी के दृष्टिगत विद्यार्थियों और जन सामान्य के लिए स्वास्थ्य चेतना कार्यक्रम

कोरोना वैश्यिक महामारी के दृष्टिगत विद्यार्थियों और जन सामान्य के लिए स्वास्थ्य चेतना कार्यक्रम

कोरोना की दूसरी लहर ने जिस तरह से सामाजिक, आर्थिक और स्वास्थ्य पक्षों को जिस प्रकार प्रतिकुल प्रवावित किया है। इसी पीड़ा को ध्यान में रखते हुए उषा संस्था, मानव निर्माण, स्वायत्त शासन संस्था, स्कूल शिक्षा और संस्कृत शिक्षा राजस्थान सरकार के साथ मिलकर एक यूनिक सोशल हैल्थ अवेयरनेस कार्यक्रम कल दिनांक 21 जुलाई, 2021 से आरम्भ कर रही है। 21 जुलाई से प्रारम्भ होने वाले इस कार्यक्रम में प्रतिदिन 12 बजे से 1:30 बजे तक स्वास्थ्य सम्बंधी विषयों पर विषय विशेज्ञय द्वारा जानकारी दी जायेगी ।
21 जुलाई से आरम्भ होने वाला यह कार्यक्रम 5 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के रूप में रहेगा। उपरोक्त संस्थाओं ने यह महसूस किया कि स्वास्थ्य विषयक सही जानकारी नहीं होने के कारण आमजन न कोरोना की पीड़ा को ज्यादा झेला है। शिक्षा के औपचारिक पाठ्यक्रमों में स्वास्थ्य विषयक जानकारी पर्याप्त न होने के कारण इस वैश्यिक महामारी का सामना करने में जहां न केवल आमजन बल्कि प्रशासन को भी बहुत मस्सकत करनी पड़ी।
इस कार्यशाला में कोरोना वायरस क्या है? कोरोना के क्या लक्षण है? इस बीमारी में करवाये जाने वाले विभिन्न टेस्ट के क्या मायने है? होम्योपैथि क्या है? होम्योपैथी चिकित्सा पद्वति की दृष्टि से व्यक्ति क्यू बीमार पड़ता है? होम्योपैथी दवाएं कैसे काम करती है? रोग-प्रतिरोध क्षमता क्या है? मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा कैसे की जा सकती है ।
इस कार्यशाला में वैकल्पिक चिकित्सा पद्वति के महत्व पर प्रकाश डाला गया है। वैकल्पिक चिकित्सा पद्वति में होम्योपैथी चिकित्सा पद्वति पर विशेष जोर दिया गया है। सम्भावित तीसरी लहर के मद्देनजर होम्योपैथी चिकित्सा पद्वति कैसे प्रभावशाली हो सकती है। इन विषयों पर व्याख्यान शामिल किए गए है ।
सेवानिवृत आई.ए.एस. प्रदीप बोरड़ इस कार्यशाला को नेतृत्व दे रहे है। उनके साथ होम्योपैथी के चिकित्सक डॉ. अजय यादव, डॉ. प्रमोद पाल, डॉ. अंशुल शर्मा और डॉ. पुनित शाह शामिल है । कोरोना में एलोपैथी चिकित्सा के मंहगे इलाज से वैकल्पिक चिकित्सा पद्वतियां सस्ती एवं प्रभावशाली है।
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