भारत और चीन की सीमा का प्रश्न अभी तक हल नहीं हुआ है यह एक जटिल मुद्दा है और इसका समाधान शांतिपूर्ण बात से होना चाहिए - राजनाथ सिंह

भारत और चीन की सीमा का प्रश्न अभी तक हल नहीं हुआ है यह एक जटिल मुद्दा है और इसका समाधान शांतिपूर्ण बात से होना चाहिए - राजनाथ सिंह

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत चीन सीमा पर तनाव के बीच लोकसभा में अपने भाषण में कहा कि भारत और चीन की सीमा का प्रश्न अभी तक हल नहीं हुआ है यह एक जटिल मुद्दा है और इसका समाधान शांतिपूर्ण बात से होना चाहिए । उन्होंने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लद्दाख का दौरा कर हमारे जवानों से मुलाकात की उनका मनोबल बढ़ाया. उन्होंने संदेश दिया कि देश हमारे वीर जवानों के साथ खड़ा है. मैंने भी लद्दाख जाकर वहां कि स्थिति का जायजा लिया है. उन्होंने कहा कि मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि हमारे वीर सैनिकों साहस शौर्य और पराक्रम को महसूस भी किया था. आप जानते हैं कर्नल संतोष मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था.
रक्षा मंत्री ने कहा कि चीन मानता है कि ट्रैडिशनल लाइन के बारे में दोनों देशों की अलग-अलग व्याख्या है. दोनों देश 1950-60 के दशक में इसपर बात कर रहे थे लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया. चीन ने लद्दाख में बहुत पहले कुछ भूमि पर कब्जा किया था, इसके अलावा पाकिस्तान ने चीन को पीओके की भी कुछ भूमि चीन को सौंप दी. यह एक बड़ा मुद्दा है और इसका हल शांतिपूर्ण और बातचीत से निकाला जाना चाहिए. सीमा पर शांति बनाए रखना जरूरी है. अभी LAC को लेकर दोनों देशों की अलग व्याख्या है. दोनों देशों के बीच शांति बहाल रखने के लिए समझौते हैं. राजनाथ सिंह ने कहा कि 1988 के बाद से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में विकास हुआ. भारत का मानना है कि द्विपक्षीय संबंध भी विकसित हो सकते हैं और सीमा का भी निपटारा किया जा सकता है. हालांकि इसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ भी सकता है.
राजनाथ सिंह ने कहा कि समझौते में कहा गया है कि जब तक सीमा का पूर्ण समाधान नहीं होता LAC का उल्लंघन नहीं किया जाएगा. 1990 से 2003 तक दोनों देशों में मिलीजुली सहमति बनाने की कोशिश की गई, लेकिन इसके बाद चीन इस दिशा में आगे नहीं बढ़ा.
उन्होंने का कि मैं सदन को अवगत कराना चाहता हूं कि चीन, भारत की लगभग 38,000 स्क्वायर किलोमीटर भूमि का अनधिकृत कब्जा लद्दाख में किए हुए है. इसके अलावा, 1963 में एक तथाकथित बाउंडरी एग्रीमेंट के तहत, पाकिस्तान ने PoK की 5180 स्क्वायर किलोमीटर भारतीय जमीन अवैध रूप से चीन को सौंप दी है. उन्होंने कहा कि भारत तथा चीन, दोनों ने, औपचारिक तौर पर यह माना है कि सीमा का प्रश्न एक जटिल मुद्दा है जिसके समाधान के लिए धैर्य की आवश्यकता है तथा इस मुद्दे का समाधान, शांतिपूर्ण बातचीत के द्वारा निकाला जाए.
रक्षामंत्री ने कहा कि इस साल अप्रैल माह से लद्दाख की सीमा पर चीन के सैनिकों और हथियारों में वृद्धि देखी गई. इसके बाद मई में चीन की सेना ने हमारी पेट्रोलिंग में बाधा उत्पन्न की जिसकी वजह से यह स्थित बनी. उन्होंने कहा कि पेंगोंग से लेकर कई जगहों पर चीनी सेना ने घुसपैठ की कोशिश की. रक्षा मंत्री ने कहा कि हमारे वीर सैनिकों ने चीनी सेना का सामना किया और उन्हें भारी क्षति पहुंचाई है और सीमा की भी सुरक्षा की. हमारे जवानों ने जहां संयंम की जरूरत थी वहां संयम रखा जहां शौर्य की जरूरत थी वहां शौर्य दिखाया।
सदन को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कोरोना काल के बावजूद हमारी सेना और आईटीबीपी का तेजी से डिप्लॉयमेंट हुआ है क्योंकि सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि हमारे बॉर्डर एरिया में मौजूदा मुद्दों का हल शांतिपूर्वक किए जाने के लिए कटिबद्ध है। इसी उद्देश्य से मैं चीन के रक्षामंत्री से मिला और 4 सितंबर को मुलाकात की गई और उस मुलाकात में साफ किया गया कि हम मुद्दे का शांति से हल चाहते हैं और यह भी चाहते हैं कि चीन इसमें सहयोग करे लेकिन हमने यह भी साफ कर दिया कि यह सदन और सारा देश सशस्त्र सेनाओं के साथ है जो भारत की संप्रभुता एवं सम्मान की रक्षा में जुटे हुए हैं.
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