जन-जन को जोड़ेंगे तो सफल होगा जलशक्ति अभियान - रत्नू

जन-जन को जोड़ेंगे तो सफल होगा जलशक्ति अभियान - रत्नू

चूरू, 10 जुलाई। जलशक्ति अभियान के केंद्रीय नोडल अधिकारी एवं भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के संयुक्त शासन सचिव राजेंद्र रत्नू ने कहा है कि राजस्थान जैसे पानी की कमी वाले प्रदेश के लिए जलशक्ति अभियान एक आमूलचूल बदलाव का वाहक बन सकता है। जरूरत इस बात की है कि हम इस अभियान से जन-जन को जोड़ें और इसे सफल बनाएं।
रत्नू बुधवार को कलक्ट्रेट सभागार में जल शक्ति अभियान से जुड़े जिले के अधिकारियों के साथ अभियान की समीक्षा कर रहे थे। इस दौरान जिला कलक्टर संदेश नायक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशक एवं बीएनओ भरत लाल मीना, एडीएम रामरतन सौंकरिया, सीईओ डीआर सुथार, एसीईओ नरेंद्र चौधरी सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारीगण मौजूद थे। बैठक में अभियान को लेकर अब तक की तैयारियों की समीक्षा करते हुए रत्नू ने कहा कि जलशक्ति अभियान के लिए बेसलाइन डाटा तैयार करें और फिर उसके विश्लेषण के अनुसार जिले का जेएसए प्लान तैयार करें। उन्होंने जिले में बुधवार की अपनी फील्ड विजिट के अनुभव साझा करते हुए कहा कि जिले में जल संरक्षण को लेकर काफी काम हुआ है, उसे आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने भूजल वैज्ञानिक लक्ष्मण सिंह राठौड़ से कहा कि वे ग्राउंड वाटर लेवल के आंकड़े एकत्र कर विश्लेषण करें कि किन गतिविधियों से यहां वाटर लेवल घटा है ताकि जल संरक्षण के लिए समुचित रणनीति बनाकर काम किया जा सके। उन्होंने कहा कि बरसात के पानी का उपयोग पेयजल के रूप में किए जाने के साथ-साथ भूजल रिचार्ज के लिए भी होना चाहिए। उन्होंने जिला कलक्टर संदेश नायक से कहा कि जो विभाग निष्क्रिय हैं, उन्हें भी इस अभियान में जोड़ें और देखें कि उनका क्या समुचित उपयोग किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमें जल संरक्षण के लिए ढांचागत काम के साथ-साथ लोगों के व्यवहार में बदलाव लाने की कोशिश करनी होगी। इसके लिए उन्होंने विभिन्न स्तरों पर वाद-विवाद, निबंध, चित्रकला एवं अन्य जागरुकता गतिविधियां आयोजित करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिले के सभी निजी, सार्वजनिक खराब पड़े बोरवेल को चिन्हित करें जो वाटर रिचार्ज के काम आ सकते हों। उन्होंने कहा कि भूजल संरक्षण के लिए इंजीनियरिंग सोल्यूशन के साथ-साथ ह्यूमन सोल्यूशन पर भी काम करें और लोगों के पुराने अनुभव के आधार पर देखें कि गांवों में किस तरह से बरसाती जल का बेहतरीन संरक्षण किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हरियाली बढाने के लिए ज्यादा से ज्यादा वृक्षारोपण हो और यह भी सुनिश्चित किया जाए कि लगाए गए पौधे सर्वाइव करें। उन्होंने कहा कि ऎसे पौधों को प्रमोट करें, जिनसे लोगों की आजीविका जुड़े। इस दौरान उन्होंने स्वयं सहायता समूहों के जरिए भी जल संरक्षण गतिविधियां कराने पर बल दिया और कहा कि भवनों में आवश्यक तौर पर वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर बनाने को प्रोत्साहित किया जाए।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के निदेशक एवं ब्लॉक नोडल अधिकारी भरत लाल मीना ने भी जल संरक्षण गतिविधियों के लेकर आवश्यक निर्देश दिए और कहा कि वृक्षारोपण में ऎसी प्रजातियों को तरजीह दें जो यहां की जलवायु के उपयुक्त हों।
जिला कलक्टर संदेश नायक ने जिले में अब तक की तैयारियों से अवगत कराया और आश्वस्त किया कि जल शक्ति अभियान की सफलता के लिए विभिन्न विभागों, संस्थाओं के समन्वय एवं सहयोग से बेहतर काम किया जाएगा। जलग्रहण अधीक्षण अभियंता राजेंद्र सिंह ने जिले में संभावित जल संरक्षण गतिविधियों पर चर्चा की। इस दौरान डीएफओ बनवारी लाल शर्मा, एसीएफ राकेश दुलार, पीएचईडी एसई पीसी मिढा, एक्सईएन रामकुमार झाझड़िया सहित संबंधित अधिकारीगण मौजूद थे। केंद्रीय नोडल अधिकारी ने बुधवार को जिले के विभिन्न स्थानों पर भ्रमण कर जल शक्ति अभियान को लेकर संभावनाएं तलाशीं और फीडबैक लिया।
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