खसरा-रुबैला टीकाकरण से देश का भविष्य होगा मजबूत - गौतम

खसरा-रुबैला टीकाकरण से देश का भविष्य होगा मजबूत - गौतम

बीकानेर,19 जुलाई। खसरा-रुबैला का टीका बच्चों-किशोरों को 2 जानलेवा बीमारियों से बचाएगा और मौजूदा अभियान के देश में सफल होने के साथ ही 2020 तक देश खसरे (मीजल्स ओरी) को हमेशा के लिए समाप्त करने की ओर अग्रसर हो जाएगा और रुबैला व जन्मजात रूबेला सिंड्रोम (सीआरएस) को नियंत्रित कर लिया जाएगा। ये अभियान नौनिहालों के स्वास्थ्य को सुरक्षा देकर देश के भविष्य को मजबूत करेगा। ये कहना था जिला कलेक्टर कुमार पाल गौतम का। वे शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभागार में खसरा-रुबैला टीकाकरण अभियान को लेकर आयोजित प्रेस वार्ता में पत्रकारों के सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने मीडिया से अपील की कि वे 22 जुलाई से शुरू हो रहे इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में महती भूमिका अदा करें और झूठी अफवाहों व नकारात्मकता को सिरे से खारिज करें। उन्होंने बताया कि ये टीका 9 माह से 15 वर्ष तक के व कक्षा 10 तक के सभी बच्चों को निःशुल्क लगाया जाएगा। उन्होंने सभी अभिभावकों को अपील की कि वे अपने बच्चों को एमआर का टीका अवश्य लगवाएं। ये टीका पूरी तरह से सुरक्षित है जिसमे मात्र चिमटी काटने जितना ही दर्द होता है। यदि पहले ये टीका लगाया हो तो भी अभियान के दौरान इसे फिर से लगवाना है। गौतम ने बताया कि अभियान को सफल बनाने के लिए चिकित्सा विभाग के साथ जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, मदरसा बोर्ड व स्वयं सेवी संस्थानों ने दिन रात एक कर रखा है लेकिन मीडिया के सहयोग बिना अधूरा है। उन्होंने पत्रकारों के प्रश्नों का जवाब देते हुए सुझावों का स्वागत किया।
सीएमएचओ डॉ देवेन्द्र चौधरी ने बताया कि 5 सप्ताह चलने वाले इस अभियान के तहत जिले में 1,988 सरकारी विद्यालयों, 1,399 निजी विद्यालयों, 1,477 आंगनवाड़ी केन्द्रों व 93 मदरसों में एएनएम व अन्य नर्सिंग स्टाफ का दल जाकर बच्चों को प्रतिरक्षित करेगा। पत्रकारों के प्रश्नों का जवाब देते हुए उन्होंने बताया कि करीब 40 से अधिक देशों में यह टीका लगाया जा रहा है, देश के 30 करोड़ से ज्यादा बच्चों को लगाया जा चुका है। जिले में फरवरी 2019 से लगाया जा रहा है । आरसीएचओ डॉ रमेश गुप्ता ने बताया कि अभियान के लिए समस्त तैयारियां कर ली गई हैं और वैक्सीन की आपूर्ति स्वास्थ्य केन्द्रों को भेजी जा चुकी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रतिनिधि डॉ मनीषा मंडल ने खसरा और रुबैला रोगों से सम्बंधित तकनीकी जानकारी दी और अभियान की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मोनिटरिंग योजना की भी जानकारी दी। उपनिदेशक सूचना एवं जन संपर्क विकास हर्ष ने सम्पूर्ण मीडिया जगत की ओर से अभियान को शीर्ष तक ले जाने के लिए पूरा समर्थन देने का भरोसा दिलाया। इस मौके पर डीपीएम सुशील कुमार, यूनिसेफ प्रतिनिधि फिरोज खान, जिला आई.ई.सी. समन्वयक मालकोश आचार्य सहित प्रमुख मीडिया हाउस से संवाददाता, फोटो जर्नलिस्ट व कैमरामेन मौजूद रहे।
क्या है खसरा-रुबैला ?
खसरा-रूबेला दोनों वायरस जनित रोग हैं जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने और छींकने से ये बीमारियाँ फैलती है। दोनों का कोई विशेष ईलाज नहीं है बल्कि लक्षणों के आधार पर उपचार देकर बुखार को नियंत्रित किया जाता है खसरा या मीजल्स को आम तौर पर ओरी या छोटी माता के नाम से भी जाना जाता है। यह अत्यधिक संक्रामक होता है। इसमें निमोनिया, डायरिया व दिमागी बुखार होने की संभावना बढ़ जाती है। चेहरे पर गुलाबी-लाल चकत्ते, तेज बुखार, खांसी, नाक बहना व आंखें लाल होना मर्ज के लक्षण हैं। यह बच्चों की मृत्यु का एक प्रमुख कारण भी है। रुबैला बच्चों में आमतौर पर हल्का रहता है जिसमे हल्का बुखार, मिचली, नेत्र शोध (कन्जेक्टिविटीज) के लक्षण दिखाई देते हैं कान के पीछे व गर्दन में सूजी हुई ग्रंथियों से पहचान में मदद मिलती है। संक्रमित वयस्क महिलाओं में गठिया के लक्षण भी मिलते हैं। रूबैला गर्भावस्था के दौरान होने पर संक्रमित माता से जन्मे शिशु को ग्लूकोमा, मोतियाबिंद, बहरापन, मंद बुद्धि व दिल की बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है। रूबैला से गर्भपात, समय पूर्व प्रसव व गर्भ में बच्चे की मौत भी हो सकती है।
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