जिले में क्लिनिकल एस्टेब्लिसमेंट एक्ट को लेकर कार्यशाला सम्पन्न

जिले में क्लिनिकल एस्टेब्लिसमेंट एक्ट को लेकर कार्यशाला सम्पन्न

भीलवाडा, 05 फरवरी। क्लिनिकल एस्टेब्लिसमेंट एक्ट के तहत चिकित्सा संस्थानों की नीति निर्माण व आमजन को अच्छी स्वास्थ्य सेवाऐं प्राप्त हो सके इस हेतु आज मंगलवार को चिकित्सा विभाग द्वारा आईएमए हॉल भीलवाडा में निजी अस्पतालों के चिकित्सकों/मैनेजरों, लैब संचालकों एवं सीएचसी व आदर्श पीएचसी के चिकित्सकों की आमुखीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला के दौरान संयुक्त निदेशक डॉ. आरपी मीना,अति0 सीएमएचओ डॉ. मुस्ताक खान, डिप्टी सीएमएचओ डॉ. घनश्याम चावला, जिला आरसीएच अधिकारी डॉ. सीपी गोस्वामी, जिला क्षय रोग नियंत्राण अधिकारी डॉ. प्रकाश शर्मा, जिला पीसीपीएनडीटी समन्वयक रामस्वरूप सेन सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
कार्यशाला के दौरान डॉ. रवि प्रकाश शर्मा, अति0 निदेशक, हॉस्पीटल प्रशासन जयपुर ने क्लिनिकल एस्टेब्लिसमेंट एक्ट में निहित प्रावधानों, फीस व रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के बारे में स्लाईड शो के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि राज्य में क्लिनिकल एस्टेब्लिसमेंट एक्ट लागू किया जा चुका है परन्तु भारत सरकार द्वारा अस्पतालों हेतु मिनिमम स्टेण्डर्ड लागू नहीं किये गए है। उन्होंने कहा कि जब तक मिनिमम स्टेण्डर्ड जारी नहीं किये जाते है तब तक अस्थाई रूप से जिले के सभी अस्पतालों में अस्थायी रूप से रजिस्ट्रेशन का कार्य करने व प्रशिक्षित स्टाफ को रखने, संस्थान द्वारा ली जाने वाली फीस की लिस्ट लैब में लगाने व डेट वाईज रिकॉर्ड का संधारण करने के निर्देश एक्ट के दायरे में आने वाले निजी व सरकारी चिकित्सा संस्थानों के चिकित्सा प्रभारियों को दिये। उन्होंने बताया कि निजी अस्पतालों को नियमानुसार पंजीकरण कराने के साथ-साथ अस्पताल की व्यवस्थाऐं भी सुधारनी होगी तथा जिन चिकित्सा संस्थानों के रजिस्ट्रेशन की अवधि समाप्त हो चुकी है, वे नियमानुसार फीस जमा कर पुनः एक वर्ष की अवधि के लिए अस्थायी प्रमाण जारी करावे। इस दौरान उन्होंने बताया कि लैबोट्रीज के लिए भारत सरकार द्वारा स्टेण्डर्ड जारी कर दिये गये है इसमें चिकित्सा संस्थान को नियमानुसार अस्थायी/स्थायी करना सुनिश्चित करावे। उन्होंने कहा कि एक्ट के तहत रजिस्ट्रेशन हेतु अस्पताल को निर्धारित फार्मेट में ऑनलाईन आवेदन करना होगा इसके बाद विभाग द्वारा इस संस्थान का निरीक्षण कर यह पता लगाया जायेगा कि आवेदन करने वाली संस्था अस्तित्व में है अथवा नहीं। इसके 10 दिन बाद संबंधित संस्थान की प्रोविजनल लिस्ट जारी की जायेगी। कार्यशाला के दौरान उन्होंने सडक दुर्घटना में घायल रोगियों को बिना किसी संकोच के अस्पताल पंहुचाने व चिकित्सकों को उनका ईलाज करने की नसीहत दी। कार्यशाला में उन्होंने बताया कि निजी व राजकीय चिकित्सा संस्थानों में मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु आवश्यक साफ-सफाई, बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन की पालना सुनिश्चित कर अपशिष्ट पदार्थो के निस्तारण हेतु कचरा निर्धारित कंटेनर में डालने के निर्देश चिकित्सकों को दिये।
कार्यशाला में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जे.सी. जीनगर ने निजी अस्पतालों के चिकित्सकों/मैनेजरों को स्वाईन फ्लू के बचाव हेतु संभावित केसेज की सूचना प्रतिदिन भिजवाने के साथ हीं मरीजों को उपचार उपलब्ध करा सहयोग प्रदान करे जिससे की उनका समय पर बचाव संभव हो सके। इस दौरान उन्होंने संभावित स्वाईन फ्लू रोगियों को टेमी फ्लू की दवा उपलब्ध करवाने के निर्देश चिकित्सा अधिकारियों को दिये।
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