जैविक एवं प्राकृतिक खेती की भ्रांतियां दूर करना आवश्यक-रामलाल जाट

जैविक एवं प्राकृतिक खेती की भ्रांतियां दूर करना आवश्यक-रामलाल जाट

भीलवाडा, 22 अगस्त/ पूर्व मंत्री एवं माण्ड़ल विधायक राम लाल जाट ने काश्तकारों का आह्वान किया कि किसानों में जैविक खेती से सम्बन्धित कई प्रकार की भ्रान्तियाँ है उनका निराकरण करना बहुत आवश्यक है। उन्होंने काश्तकारों को सूचित किया कि वे स्वंय जैविक खेती से सम्बन्धित किसी भी प्रकार की सुविधा/समस्या के निराकरण के लिए सदैव तैयार है। वे कृषि विज्ञान केन्द्र भीलवाड़ा द्वारा आर्ट ऑफ लिविंग के तत्त्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
कार्यशाला के सूत्राधार भीलवाड़ा के पूर्व उपखण्ड़ अधिकारी एवं वर्तमान में कार्मिक विभाग में आयुक्त जाँच, राजस्थान सचिवालय जयपुर में कार्यरत राजकुमार सिंह शेखावत ने काश्तकारों से कहा कि मिट्टी में 108 पौषक तत्त्वों की आवश्यकता होती है उसमें से 98.5 प्रतिशत कार्बन, हाइड्रोजन, आॅक्सीजन प्रकृति से प्राप्त होती है। मात्रा 1.5 प्रतिशत ही कृत्रिम रूप से नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटास, कैल्शियम, मैग्निशियम एवं सल्फर के अतिरिक्त 99 अन्य गौण पोषक तत्त्व प्रदत्त किये जाते है।
कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. ओ. पी. पारीक ने जैविक खेती के महत्त्व पर चर्चा करते हुए अवगत कराया कि इसके करने से न केवल मृदा स्वास्थ्य में सुधार होता है बल्कि गुणवत्तायुक्त उत्पादकता भी कम पानी से प्राप्त होती है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में आर्ट ऑफ लिविंग की वरिष्ठ प्रशिक्षिका सूरत से श्रीमती सेजल स्वामी एवं जयपुर से श्रीमती कल्पना शेखावत एवं श्रीमती नीलिमा कान्त ने किसानों को देशी गाय के गोबर एवं गौमूत्रा से खाद बनाने की विधि, पत्तियाँ, गौमूत्रा आदि से पौधों के लिए जैविक दवाईयाँ बनाने की विधि एवं कच्ची सब्जियों एवं फलों के छिलकों से एन्जाइम बनाना सिखाया जो कि न केवल रासायनिक प्रभावों को कम करती है बल्कि उर्वरकता भी बढ़ाती है। ये कृषि के क्षेत्रा में किसी क्रान्ति से कम नही है। किसानों को रासायनिक खेती छोडने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यशाला का संचालन करते हुए पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. सी. एम. यादव ने प्राकृतिक खेती में वेस्ट डिकम्पोजर, वर्मीवाष एवं वर्मीकम्पोस्ट की उपयोगिता समझाई। प्रशिक्षण के पश्चात् जागरूक एवं प्रगतिशील किसानों का प्रोजेक्ट भारत मिशन के तहत् गाँव प्रतिनिधि के रूप में चयन किया जायेगा। कार्यशाला में सहायक निदेशक डॉ. एस. एस. राठौड़, केन्द्र के शस्य वैज्ञानिक डॉ. के. सी. नागर, पूर्व कृषि उपज मण्ड़ी निदेशक करण सिंह के अतिरिक्त भीलवाड़ा जिले के 130 किसान उपस्थित थे। केन्द्र के तकनीकी सहायक महेन्द्र सिंह चुण्ड़ावत ने अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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