पशुओं का लू व तापघात से करें बचाव

पशुओं का लू व तापघात से करें बचाव

बारां, 11 जून। प्रदेश में पशुधन को भीषण गर्मी, लू एवं तापमान के दुष्प्रभावो से बचाने के लिए पशुपालन विभाग द्वारा पशुपालकों को एहतियात बरतने की सलाह दी गई है।
पशुपालन विभाग के सहायक निदेशक डॉ. हरिबल्लभ के अनुसार भीषण गर्मी की स्थिति में पशुधन को सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रबन्धन एवं उपायों, जिनमें ठंडा एवं छायादार पशु आवास, स्वच्छ पीने का पानी आदि पर घ्यान दिये जाने की आवश्यकता हैं। तेज गर्मी से बचाव प्रबंधन में जरा सी लापरवाही से पशु को ’लू’ नामक रोग हो जाता है। ’लू’ से ग्रस्त पशु को तेज बुखार हो जाता है और पशु सुस्त होकर खाना पीना बन्द कर देता है। शुरू में पशु की श्वसन गति एवं नाडी गति तेज हो जाती है। कभी कभी नाक से खून भी बहने लगता है। पशुपालक के समय पर ध्यान नहीं देने से पशु की श्वसन गति धीरे-धीरे कम होने लगती है एवं पशु चक्कर खाकर बेहोशी की दशा में ही मर जाता है।
पशुपालकों को सलाह दी जाती है कि वे पशु आवास हेतु पक्के निर्मित मकानो की छत पर सूखी घास या कडबी रखें ताकि छत को गर्म होने से रोका जा सके। पशु आवास के अभाव मे पशुओं को छायादार पेडो के नीचे बांधना चाहिए। पशु आवास मे गर्म हवाओ का सीधा प्रवाह नही होने पावे इसके लिए लकडी के फंटे या बोरी के टाट लगाकर गर्म हवाओ को रोका जा सकता है तथा आवश्यकता पडने पर बोरी के टाट को गीला कर दे, जिससे पशु आवास में ठण्डक बनी रहेगी। पशु आवास गृह में आवश्यकता से अधिक पशुओं को नही बांधे तथा रात्रि में पशुओं को खुले स्थान पर बांधे। गर्मी के मौसम में पशुओं को हरा चारा अधिक खिलावें,पशु इसे चाव से खाता है तथा हरे चारे में 70-90 प्रतिषत जल की मात्रा होती है, जो समय-समय पर पशु शरीर को जल की आपूर्ति भी करता है। इस मौसम में पशुओं को भूख कम व प्यास अधिक लगती है। इसके लिए गर्मी मे पशुओ को स्वच्छ पानी आवश्यकतानुसार अथवा दिन में कम से कम तीन बार अवश्य पिलावें इससे पशु शरीर के तापमान को नियन्त्रित बनाये रखने मे मदद मिलती हैं इसके अलावा पानी में थोडी मात्रा में नमक व आटा मिलाकर पिलाना भी अधिक उपयुक्त इससे अधिक समय तक पशु के शरीर में पानी की आपूर्ति बनी रहती है, जो शुष्क मौसम मे लाभकारी भी हैं। पशु को प्रतिदिन ठण्डे पानी से भी नहलाना चाहिए।
पशुओं को ’लू’ लगने पर प्याज का रस एवं पानी में ग्लूकोज अथवा नमक व शक्कर घोलकर पिलाना चाहिए। ’लू’ लगने पर पशु को ठण्डे स्थान पर बांधे तथा माथे पर बर्फ या ठण्डे पानी की पट्टियां बांधने से पशु को तुरन्त आराम मिलेगा। पशु मे बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरन्त नजदीकी पशु चिकित्सक से सम्पर्क कर पशु का उपचार करावें जिससे पशुधन तथा उसके उत्पादन में होने वाली हानि से बचा जा सकता है।
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