वायु मार्ग से द्रोणगिरी पर्वत ही उठा लाए बजरंगी

वायु मार्ग से द्रोणगिरी पर्वत ही उठा लाए बजरंगी

बारां 8 अक्टूबर। श्री महावीर कला मण्डल संस्थान बारां द्वारा आयोजित रामलीला में सोमवार की रात लक्ष्मण मेघनाथ संग्राम, लक्ष्मण मूर्छा, संजीवनी आगमन व कुम्भकर्ण वध का जीवंत चित्रण किया गया। कलाकारों की शानदार प्रस्तुति से दर्शकों का हजूम देर रात तक परिसर में जमा रहा।
संस्थान के उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र शर्मा ने बताया कि लगातार पराजय से तंग आकर रावण ने अपने सबसे बलशाली पुत्र मेघनाथ को रणभूमि में जाने का आदेश दिया। मेघनाथ ने कुलदेवी की पूजा कर दिव्य शक्तियां बटोरी और लक्ष्मण मेघनाथ के मध्य रणभूमि में हुए भीषण संग्राम में ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर लक्ष्मण को मूर्छित कर दिया। राम अपने प्यारे भाई लक्ष्मण को अचेत देखकर विलाप करने लगे। तो उधर लंका में पहली विजय पर उत्सव का माहौल बन गया। रामादल के वीर सिपाही अंगद ने सुझाव दिया कि मेरे नाना वैद्य सुषेण मूर्छित लक्ष्मण का उपचार कर सकते है। वैद्य सुषेण ने परीक्षण कर प्रातः तक द्रोणागिरी पर्वत से संजीवनी बुटी लाने को कहा। हनुमान ने एकबार फिर इस दुरूह कार्य करने का बीडा उठाया। वे द्रोणागिरी पर्वत की ओर प्रस्थान कर जाते है। रावण को सूचना मिलती है तो वो तुरन्त मायाजाल फेला कर कालनेमी को हनुमान को रोकने हेतु द्रोणागिरी पर्वत भेजता है लेकिन वहां हनुमान उसका वध कर देते है। संजीवनी बुटी की पहचान न होने की वजह से वे पूरा पर्वत ही उखाड कर लंका ले आते है। इस दौरान पवन पुत्र को करीब डेढ सौ फीट पर्वत समेत हवा में उडता देख दर्शक रोमांचित हो गये। संजीवनी के उपचार से लक्ष्मण स्वस्थ्य हो जाते है। अब रामादल में उत्सव तो लंका में कोहराम मच जाता है। क्रोधित रावण कुम्भकर्ण के पास जाता है। उसे जगाकर युद्ध भूमि में भेजता है। इस दौरान रावण कुम्भकर्ण के जोशीले संवादों पर दर्शक स्तब्ध रह गये। रणभूमि में हनुमान के मुष्ठिका प्रहार से कुम्भकर्ण कुछ देर के लिये चेंतना शून्य हो जाता है। वो मुक्तकंठ से हनुमान के शौर्य की प्रशंसा करता है। लेकिन भीषण संग्राम के दौरान राम के युद्ध कौशल के आगे टिक नहीं पाता और राम के हाथों मारा जाता है।
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