शिव महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ से वातावरण भक्तिमय

शिव महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ से वातावरण भक्तिमय

उदाजी का गढ़ा में 9 दिवसीय चल रहे शिव महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है । 29 मई से प्रारंभ हुए इस यज्ञ में जिले के अलावा दूसरे राज्य के सैकड़ों भक्त बढ़-चढ़कर भाग ले रहे है । सुबह से लेकर शाम तक भक्तों की भीड़ कथा स्थल पर देखी जा रही है । इस गर्मी में भी महिलाओं से लेकर पुरुष लालीवाव मठ के पीठाधीश्वर श्री हरिओमदासजी महाराज की रसमयी वाणी को सुनने के लिए कथा पाण्डाल में जमे हुए रहते है । महाराज श्री ने शिव महापुराण कथा माहात्म्य का सार बताते हुए कहा कि जीवन में यदि भक्ति ज्ञान का समन्वय हो जाए तो परमात्मा जीवन की समस्त विघ्न बाधाएं, परमात्मा स्वतः ही दूर करते हैं और अपनी अहेतु की कृपा अपने भक्तों पर बरसाते हैं ।
सत्यता ही जीवन का श्रृंगार
सत्यता अपनाने वाला व्यक्ति जीवन में कभी हार नहीं सकता । सत्यता ही जीवन का श्रृंगार है । उक्त उद्गार सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल उदाजी का गढ़ा में चल रही शिव महापुराण कथा के द्वितीय दिवस में भक्तों को कथा का रसपान करवाते हुए कथा व्यास हरिओमदासजी महाराज ने व्यक्त किए । महाराज श्री ने शिव प्राकट्य कथा के संदर्भ में कहा कि भगवान शंकर सदा सत्य का साथ देते हैं । ब्रह्मा और विष्णु में श्रेष्ठता को लेकर मतभेद को सुलझाने के लिए दोनों के बीच भगवान शिवलिंग रूप में प्रकट हुए । लिंग के आदि और अंत का पता लगाने में ब्रह्मा ने असत्यता अपनायी । इसलिए भगवन शिव ने उन्हें नकार दिया और भगवान विष्णु को श्रेष्ठ माना । यहां तक की केतकी के पुष्प को भी असत्य का साथ देने के लिए उसका त्याग कर दिया । शिवजी ने ब्रह्मा को श्राप दिया कि उनकी पूजा कहीं नहीं की जायेगी, क्योंकि ब्रह्माजी ने असत्यता का पालन किया । विष्णु के कहने पर भगवान शिवजी ने कहा कि विश्व में ब्रह्माजी का केवल एक ही मंदिर होगा, वह पुष्कर में है । इसके अतिरिक्त कोई भी यज्ञ या हवन या शुभकार्य होगा, वहां ब्रह्म के स्थान की स्थापना की जायेगी । भगवान शिवजी ने विष्णुजी से कहा कि आप सत्य के मार्ग पर चले, इसलिए आप कण-कण में व्याप्त होंगे और धरती पर 24 अवतार लेकर जन कल्याण का कार्य करेंगे । साथ ही पूजा करने वाले आपके सबसे प्रिय होंगे । महाराजश्री ने कहा कि शंकरजी सत्य हैं, ओर उनके तीन नाम सत्यम्, शिवम्, सुन्दरम् है । जहां सत्य है, वहां शिव है ओर जहां शिव है, वहां सुन्दर है । झूठ पर चलने वाले अपूजनीय हो जाते है । महाराज श्री ने कहा कि जो गौशाला, ब्राह्मण, माता-पिता का हक खाते है, वह जिन्दगी में कभी सुखी नहीं रहते । महादेव द्वादश ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट होकर 12 स्थानों पर स्थापित हुए । ज्योतिर्लिंग के दर्शन से जीवन के सारे पाप कट जाते हैं ।
महाराज श्री ने कहा कि जब व्यक्ति का शरीर ठीक रहता है, तो बुद्धि खराब हो जाती है और बुद्धि ठीक रहती है, तो शरीर साथ देने लायक नहीं रहता, इसलिए समय रहते 12 ज्योतिलिंग के दर्शन करने का प्रयास करें ।
महाराज श्री ने कहा कि मनुष्य का स्वभाव है कि वह हमेशा ही दूसरों को दोष देता है, लेकिन जो भी हम दुःख भोग रहे हैं, वे हमारे कर्मों के परिणाम हैं । कुछ कर्म ऐसे भी होते हैं, जो आपके खाते में जुड़ जाते हैं, कर्मों में जो अच्छे हैं, वे अच्छा फल देंगे, जो बुरे हैं, वह बुरा फल देंगे । शिव चरित्र ही जीवन को को सादगी और कर्मठ बनाने वाला है । शिव को मानने वाला कभी अधोगामी नहीं हो सकता ।
सरस्वती विद्या मंदिर उदाजी का गढ़ में सवा लक्ष पार्थेश्वर पूजा महाविधान शुरू
मिट्टी के शिवलिंग बनाकर पूजन को उमडे़ शिवभक्त
उदाजी का गढ़ा में सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल में 9 दिवसीय शिव महापुराण कथा के अन्तर्गत सवा लक्ष पार्थेश्वर शिवलिंग पूजा महाविधान अनुष्ठान शुरू हुआ ।
लालीवाव पीठाधीश्वर महन्तश्री हरिओमशरणदास महाराज के सान्निध्य एवं जाने-माने कर्मकाण्डी पण्डित समरथ मेहता के आचार्यत्व में शिवभक्त साधकों के समूहों ने मिट्टी की विधिविधान से शुद्धिकरण मंत्रों से संस्कार पूजा की और मिट्टी के शिवलिंग बनाकर इनमें वैदिक ऋचाओं और मंत्रों से प्राण-प्रतिष्ठा करते हुए विभिन्न देवी-देवताओं की आकृतियों के साथ हीयंत्र का निर्माण किया ।
गुरुवार को कथा में ब्रह्मपीठाधीश्वर महंत श्री घनश्यामदासजी महाराज, छींछ व अन्य संत महात्माओं का आशीर्वाद प्राप्त हुआ, स्कूल परिवार द्वारा इनका शाल ओढ़ाकर एवं पुष्पमाला पहनाकर स्वागत सत्कार किया । इसके साथ ही सायं 5 बजे पार्थिव शिवलिंग अभिषेक, भगवानजी को भोग एवं उसके बाद व्यासपीठ की आरती उतारी गई एवं प्रसाद वितरण किया गया ।
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