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निःशुल्क योग शिविर

योगापीस संस्थान , एकम योगा एवं शेखावाटी विकास परिषद ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में ट्रस्ट के शेखावाटी भवन में (सेक्टर-1 विद्याधर नगर).....
 
 

वृक्षासन

जिस तरह वृक्ष एक तने पर स्थिर रहता है उसी प्रकार एक पैर उठाकर स्थिर खडे रहने की वजह से इस आसन का नाम वृक्षासन है। विधि : समस्थिति में खडे.....
 
 

उत्थितपार्श्वकोणासन

अर्थ - उत्थित यानि खड़ा, अतः खडे़ होकर किये जाने वाले आसनों के नामों में उत्थित शब्द का इस्तेमाल किया जाता है । इस आसन में हम खड़े होकर अपने.....
 
 

ताडासन

अर्थ - इस आसन में शरीर को तानकर ताड़ के वृक्ष की तरह लम्बा और सीधा करते है, अतः इसे ताड़ासन कहते है। विधि - दोनों पैरों के एड़ी व पंजों को मिलाकर.....
 
 

शीर्षासन

शीर्षासन अर्थ - सिर (शीर्ष) के बल खड़े रहने के कारण इस आसन का नाम शीर्षासन है। जिस तरह मुखिया के बगैर घर अधूरा होता है, उसी तरह शीर्षासन के बिना.....
 
 

समस्थिति

अर्थ : इस प्रकार खड़ा होना जिससे शरीर का भार दोनों एड़ियों व पंजों पर समान रूप से वितरित हो । विधि - खड़े रहने का सही तरीका समस्थिति है ओर केवल.....
 
 

पादहस्तासन

अर्थ - इस आसन में पांव (पाद) को हाथों (हस्त) से पकडते हैं इसलिए इसे पादहस्तासन या हस्तपादासन कहते है। विधि - दोनों पैरों की एडी ओर पंजे मिलाकर.....
 
 

भुजंगासन

अर्थ - भुजंग एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है सर्प । इस आसन में हमारे शरीर की आकृति फन उठाये सर्प की तरह होती है अतः इसे भुजंगासन कहते है। विधि.....
 
 

बद्ध कोणासन

अर्थ : इस आसन में शरीर की आकृति एक बंधे हुये कोण की होती है, अतः इसे बद्ध कोणासन कहते है । विधि - दोनों पैर (मिले हुये) सामने फैलाकर सीधे होकर.....